कवर्धा

*छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन कबीरधाम* *टीईटी के विरोध में धरना रैली हेतु दिल्ली के रामलीला मैदान पहुँचें कबीरधाम जिले के जाबाँज शिक्षक* कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़

*छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन कबीरधाम*

*टीईटी के विरोध में धरना रैली हेतु दिल्ली के रामलीला मैदान पहुँचें कबीरधाम जिले के जाबाँज शिक्षक*

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़

कवर्धा**टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के केंद्रीय अध्यक्ष दिनेश चन्द्र शर्मा के केंद्रीय नेतृत्व व छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर के प्रांतीय नेतृत्व एवं कबीरधाम जिला अध्यक्ष प्रेम नारायण शर्मा के मार्गदर्शन तथा कार्यकारी अध्यक्ष केशलाल साहू व जिले के चारों ब्लॉक अध्यक्ष लोकेंद्र चंद्रवंशी, राजेश प्रसाद मिश्रा, सुरेश सिंह ठाकुर, धर्मू दास कुर्रे व सहायक शिक्षक फेडरेशन के सक्रिय साथियों के विशेष प्रयास व सहयोग से देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में टीईटी (TET) अनिवार्यता के विरोध में आयोजित महान धरना प्रदर्शन,रैली एवं आंदोलन के लिए हमारे कबीरधाम जिले से कार्यकारी जिला अध्यक्ष केशलाल साहू ,जिलापदाधिकारी संजय साहू सहित जाँबाज शिक्षक साथी बड़ी संख्या मे पहुँचें।

टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता के विरोध में शनिवार को राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में देशव्यापी शिक्षक आंदोलन का विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक रैली में देशभर से लगभग 20 लाख शिक्षक अपनी नौकरी और अधिकारों की रक्षा के लिए एकत्रित हुए। आंदोलन में भारत के विभिन्न राज्यों के शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की।इस आंदोलन का आयोजन टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले किया गया। रैली में शिक्षकों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर “No TET Before RTE Act” के नारे लगाए और सरकार से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की।रैली का नेतृत्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा, फैडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बसंत कौशिक, प्रदेश सचिव राजू टंडन प्रदेश कोषाध्यक्ष शेषनाथ पांडे सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया।वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा, जो उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, ने मंच का संचालन करते हुए शिक्षकों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा।रैली में वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता परीक्षा थोपना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए।मुख्य माँगेंसंसद में विधेयक लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए।नियुक्ति के समय निर्धारित मूल सेवा शर्तों का सम्मान किया जाए।20–25 वर्षों से सेवा कर रहे शिक्षकों को नई परीक्षा के नाम पर प्रताड़ित करना बंद किया जाए। *आंदोलन का संदेश* -शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि सरकार को उनकी आवाज सुननी चाहिए और इस “काले कानून” को खत्म करना चाहिए। किसी भी शिक्षक को जबरन नई पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य न किया जाए।

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