इस्लाम स्वामी रामतीर्थ की दृष्टि में पत्रकार श्रीपाल शर्मा की कलम से

- इस्लाम स्वामी रामतीर्थ की दृष्टि में
पत्रकार श्रीपाल शर्मा की कलम से
स्वामी रामतीर्थ अपने देश में एक बहुत बड़े संत हुए। उन्होंने कभी अपने मठ तथा आश्रम की स्थापना नहीं की, इस कारण ज्यादा प्रसिद्ध नहीं हुए। उन्हें विश्व की अनेक भाषाओं का ज्ञान था। उर्दू, फारसी, अरबी के वे प्रकाण्ड विद्वान थे।
उनके अनुसार इस्लाम का शाब्दिक अर्थ होता है शान्ति का मजहब। परन्तु इस्लाम के अनुयायियों ने अपने धर्म के सिद्धान्त के विपरीत काम किया। इस्लाम मानने वालों ने भोले भाले मुसलमानों को धर्मान्धता का पाठ पढ़या, लाखो गैर मुसलमानों को उनके परिवार से वंचित कर विदेश के मुस्लिम देशों में गुलाम बनाकर भेड़ बकरी की तरह बेच दिया। अनेक महिलाओं को विधवा बना दिया। उनकी इज्जत लूटी। कुफ्र तथा काफिर का गलत मतलब निकाला। अनेक बच्चों को यतीम बना दिया।
यह इस्लाम के नाम पर हुआ जिसे शान्ति का मजहब कहा जाता है।
स्वामीजी का कहना है कि इस्लाम के अनुयायियों ने धर्म परिवर्तन के लिए आतंकवाद का सहारा लिया, उसका सबसे ज्यादा शिकार भारत हुआ है। आज भी भारत में विदेशी शासकों के इशारे में दंगे होते हैं, निर्दोष लोगों पर अत्याचार किया जाता है। मुस्लिम इतिहासकारो के अनुसार लाखो मासूम मौत के घाट उतार दिये गये। मुस्लिम सेनाओ द्वारा लाखो घर जलाकर राख कर दिये गये। इस्लाम के नाम पर अत्याचार, असहनीय यातना, बेरहमी पूर्वक क़त्ल किये गये, तानासाही का नंगा नाच किया गया।
स्वामी जी का कहना है कि गैर मुसलमानों को जिंदा जलाया गया। गुरु गोविंद सिंह के दो बच्चों को यातनापूर्वक कत्ल किया गया, जो बच्चे मात्र 8-10 साल के थे। उन्होंने इस्लाम धर्म मानने से इन्कार कर दिया था। कुछ भले मुसलमानों को छोड़ कर अधिकांश मुसलमानों ने इस्लाम के नाम पर गैर मुसलमानों को जो पीड़ा दी, अत्याचार किया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
स्वामी जी का यह भी कहना है कि आम मुसलमानों के अनुसार काफिर वह है जो इस्लाम का अनुनायी न हो, परन्तु यह व्याख्या गलत है। काफिर का मतलब यह है जो व्यक्ति सत्य के विपरीत अपने अहं व स्वार्थ को बनाये रखना चाहता है। सत्य क्या है? जो आज भी रहेगा, कल भी रहेगा व भविष्य में भी रहेगा।
धर्मप्रचार के जूनून मे जहाँ भी गये, इस्लाम के अनुनायियों ने खून खराबा, अत्याचार व नृशंस हत्या की। मुसलमानों के अनुसार जो मुहम्मद पैगम्बर पर विश्वास नहीं करता, उसे जीने का कोई अधिकार नहीं है। कुरान पर श्रद्धा न रखने वाला काफिर है, उसे जिंदा नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
स्वामीजी के अनुसार संकीर्ण विचारधारा से उत्पन्न निर्देयता से शान्ति का धर्म इस्लाम से कोई संबंध नहीं है। आम मुसलमानों द्वारा जो गैर मुसलमानों से अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है, वह इस्लाम के मूल सिद्धांतो के विवरीत है। मुहम्मद पैगम्बर अपने अनुयायियों के इस प्रकार किये गये कृत्यो से बहुत दुखी होते होगें।
कुछ लोगों ने अपने राजनीतिक स्वार्थवस भोले भाले मुसलमानों को बहकाकर उनके मन में गैर मुसलमानो के प्रति घृणा का भाव भरा है, वह गलत है। स्वामी जी का कहना है कि कुरान के अनुसार अल्लाह कि निगाह में सारे विश्व के प्राणी एक है व सभी उनकी संतानें है।
अत्याचारी मुसलमान क्या ईमानदारी पूर्वक अपने आप को सच्चा मुसलमान कह सकते हैं?



