कवर्धादुर्ग

: आज भी समय है अगर पूरा विश्व अपने धर्म के अनुरूप मंदिरों का पट खोल दे तो शायद इस महामारी से जल्दी निजात मिल जाएगा,,जानकी देवी ठाकुर

:डी एन योगी  कवर्धा,,कोरोना काल एक भयावह परिस्थिति में लाकर खड़े कर दिया है दुनिया को इससे बाहर आने के लिये हिम्मत और धैर्य की आवस्यकता है इस भीषम महामारी से,,
: निकलने के लिए पूरे विश्व के बुद्धिजीवी रात दिन एक कर दिए हैं लेकिन वो हमारे सहयोग के बिना कुछ भी नही कर सकते हमे सतर्क रहकर इस समय नियमो का पूरी तरह कड़ाई से पालन करना होगा मरने वालों की संख्या द्वितीय विश्व युद्ध से ज्यादा होगी आयशा अनुमान लगाया जा रहा है अन्य देशों के मुकाबले भारत इस संकट से उबरने के बाद जल्द ही विकास की गति पकड़ेगा क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है क्योंकि भारत के अधिकांस छोटे और मध्यम उद्द्योग कृषि और वनस्पति पर डिपेंड करते हैं जिसमें प्रकृति की अहम भूमिका है
आदिकाल से हमारे पूर्वज धर्म,प्रकृति,,ईस्वर को ही सब कुछ मानते आरहे हैं हम जब तक धर्म,ईस्वर पर भरोसा करते रहे हैं पूरा विश्व सुखी था ,,जब भी हमने अपनी सीमा लांघने की कोशिश की तब प्रकृति ने इंसानो को तबाही का रास्ता दिखाया है वर्तमान युग में हम पुनः प्रकृति के नियमो को तोड़ कर हमने ईस्वर की बराबरी करने की कोशिश की है चन्द्र,मंगल,पृथ्वी,सूर्य न जाने कितने ग्रह
जिनसे ब्रम्हांड सन्तुलित है 9,ग्रहों की हम पूजा भी करते हैं कोई तो वजह होगा कि शास्त्रो में पवन,पानी,अग्नि,समंदर और भी कई चीजों को देवता का स्थान मिला है जिसे हमने यूँ नकार दिया पहुच गए चन्द्रमा में धरती तो हमसे सम्हलती नही चल दिये आकाश सम्हालने इन्शान भी कितना मूर्ख है धरती का एक ज्वाला मुखी ,,छोटी नदी का बाढ़ समुद्र का तूफान तो सम्हलता नही चल दिये आकाश पर भगवान बनने इस महामारी से बचा जा सकता है अगर हम अपना अहंकार त्याग कर ईस्वर के शरण मे जाय ,,विज्ञान जीवन यापन का जरिया हो समता है ईस्वर नही,,
: आज भी समय है अगर पूरा विश्व अपने धर्म के अनुरुप मंदिरों का पट्ट खोल दे तो शायद इस महामारी से जल्दी निजाद मिल जाएगा और भगवान की परीक्षा भी हो जायेगी ,,शरण में आये हुए प्राणियों की प्रभु सहायता करते हैं या नही

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