उप मुख्यमंत्री से कराया गया लोकार्पण, अब उपेक्षा और अव्यवस्था की भेंट चढ़ रही चौपाटी कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

उप मुख्यमंत्री से कराया गया लोकार्पण, अब उपेक्षा और अव्यवस्था की भेंट चढ़ रही चौपाटी
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट
पंडरिया नगर के मध्य स्थित क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने तथा नागरिकों को व्यापारिक एवं मनोरंजन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से निर्मित सर्वसुविधायुक्त चौपाटी आज अपनी दुर्दशा पर स्वयं प्रश्नचिन्ह खड़ा करती दिखाई दे रही है। जिस महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव के करकमलों द्वारा बड़े ही भव्य आयोजन के साथ किया गया था, वही परियोजना आज प्रशासनिक उदासीनता और योजनागत विफलता का प्रतीक बनती जा रही है।
लोकार्पण के अवसर पर चौपाटी को पंडरिया नगर की नई पहचान, स्थानीय रोजगार संवर्धन का केंद्र तथा नगरीय विकास की आधारशिला बताया गया था। किंतु समय बीतने के साथ ही इन दावों की वास्तविकता सामने आने लगी। वर्तमान में चौपाटी परिसर में निर्मित अधिकांश दुकानें बंद पड़ी हैं और उन पर ताले लटक रहे हैं। नगर पालिका परिषद द्वारा दुकानों के आवंटन हेतु दो बार नीलामी प्रक्रिया आयोजित की गई, किंतु दोनों प्रयास अपेक्षित सफलता प्राप्त करने में असफल रहे।
यह स्थिति निर्माण कार्य की व्यवहारिकता और पूर्व नियोजन पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। यदि व्यापारिक गतिविधियों की संभावनाओं एवं बाजार की मांग का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया था, तो आखिरकार इतनी बड़ी राशि खर्च कर इस परियोजना को मूर्त रूप देने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई? नगरवासियों का मानना है कि बिना दूरदर्शी रणनीति और व्यावहारिक अध्ययन के तैयार की गई योजनाएं अक्सर इसी प्रकार निष्प्रभावी सिद्ध होती हैं।
चौपाटी की बदहाली केवल बंद दुकानों तक सीमित नहीं है। परिसर को आकर्षक स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से लगाए गए पौधे भी संरक्षण एवं नियमित देखरेख के अभाव में सूखने लगे हैं। अनेक पौधे पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, जबकि शेष पौधे भी जीवन संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। जिस परिसर को हरियाली और सौंदर्यीकरण का केंद्र बनाया जाना था, वहां आज उपेक्षा और लापरवाही के स्पष्ट चिन्ह परिलक्षित हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विकास कार्यों में करोड़ों और लाखों रुपये व्यय करने के बाद उनके रखरखाव एवं संचालन की जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लिया जाता। निर्माण कार्य पूर्ण होने और लोकार्पण समारोह संपन्न होते ही अधिकांश परियोजनाएं प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो जाती हैं। परिणामस्वरूप जनधन से निर्मित परिसंपत्तियां अल्प समय में ही अपनी उपयोगिता और प्रासंगिकता खो बैठती हैं।
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि किसी भी विकास परियोजना का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूर्ण कराना नहीं, बल्कि उसका सतत संचालन और जनहित में प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना भी होना चाहिए। यदि लाखों रुपये की लागत से निर्मित दुकानें खाली पड़ी हों, पौधे सूख रहे हों और पूरा परिसर वीरानी का दंश झेल रहा हो, तो यह न केवल प्रशासनिक अक्षमता का परिचायक है बल्कि सार्वजनिक धन के समुचित उपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आशंका व्यक्त की जा रही है कि यदि समय रहते सुधारात्मक एवं पुनर्जीवन संबंधी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह चौपाटी पूर्णतः जर्जर अवस्था में पहुंच सकती है। जिस परियोजना को नगर के विकास और गौरव का प्रतीक बताया गया था, वही आज अव्यवस्था, कुप्रबंधन और जवाबदेही के अभाव का जीवंत उदाहरण बनती जा रही है।
अब नगरवासियों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हुई हैं। जनता यह जानना चाहती है कि क्या इस निष्प्रभावी होती परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी? क्या खाली पड़ी दुकानों के उपयोग एवं संचालन के लिए नई रणनीति बनाई जाएगी? क्या परिसर के संरक्षण एवं रखरखाव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? अथवा यह चौपाटी भी उन सरकारी परियोजनाओं की सूची में शामिल हो जाएगी, जिनकी उपयोगिता केवल लोकार्पण समारोहों और प्रचार-प्रसार तक ही सीमित रह जाती है?
पंडरिया नगर में आज यही चर्चा का विषय बना हुआ है कि विकास का प्रतीक बताई गई चौपाटी आखिर इतनी शीघ्र बदहाली का शिकार कैसे हो गई और इसके लिए उत्तरदायी कौन है।




