
पार्टी हाई कमान ने राष्टीय उपाध्यक्ष बना कर प्रदेश से रमन प्रभाव का किया अंत ,बृजमोहन अग्रवाल ,ननकीराम कंवर की हुई राह आसान
रायपुर : प्रदेश की राजनीति में धूमकेतु की तरह 15 वर्षों तक एकतरफा राज करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को प्रदेश की राजनीती से दूर करने में उनकी पार्टी के बड़े नेता लगभग कामयाब होते नजर आ रहे है. उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनने से रोकने में कामयाब होने के उनकी पार्टी में उनके विरोधी नेता उन्हें भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बनने से रोकने में भी कामयाब हो गए . पार्टी हाई कमान ने उन्हें राष्टीय उपाध्यक्ष का पद देकर संकेत दे दिया है कि वे अब राज्य की राजनीती से दूर कर दिए जायेंगे . भविष्य में उन्हें लोकसभा चुनाव लडवाया जा सकता है . इस तरह प्रदेश में रमन प्रभाव का अंत करने में उनके विरोधी कामयाब होते दिख रहे है .
इस सम्बन्ध में राजनितिक चिंतको का मानना है कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह अपनों के ही बीच बुरी तरह घिर गए हैं। नई सरकार एक-एक कर जिस तरह से मामले उजागर कर रही है, वह तो डॉ. रमन के लिए खतरा है ही, किन्तु भाजपा के ही कई कद्दावर नेता उनकी राजनीती को तबाह करने पर तुले हुए हैं। इन सबके बीच पार्टी आलाकमान ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपकर यह बताने की कोशिश की है कि अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनकी नहीं चलेगी। नेता प्रतिपक्ष बनने की भरपूर कोशिश करने वाले डॉ. रमन को पार्टी विधायकों का साथ नहीं मिल पाया था। बृजमोहन अग्रवाल व ननकीराम कंवर के समर्थक विधायको ने उनके नाम का विरोध कर दिया था। इसके चलते उन्होंने कूटनीति से काम लेते हुए धरमलाल कौशक नेता प्रतिपक्ष बनवा कर बृजमोहन अग्रवाल व ननकीराम कंवर को चारो खाने चित्त कर दिया। इससे नाराज इन नेताओ ने प्रदेश की राजनीती से रमन सिंह को हटाने का ही संकल्प ले लिया है. बताया जा रहा है कि डॉ रमन प्रदेश भाजपाध्यक्ष बनने की फ़िराक में थे किन्तु भाजपाध्यक्ष की नियुक्ति से पहले ही उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया गया। यह भी कयास लगाया जा रहा है कि उन्हें लोकसभा का चुनाव लड़वाया जा सकता है। यदि वे चुनाव लड़कर जीते तो छत्तीसगढ़ की राजनीति से पूरी तरह से विदा हो जाएंगे। धरमलाल कौशिक को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी प्रदेश में नए अध्यक्ष की तलाश में है। इसके लिए कई नाम चर्चा में हैं, किन्तु संभावना थी कि डॉ. रमन सिंह को इस पद पर बिठाया जाएगा। डॉ. रमन की भी यही मंशा थी कि प्रदेश में संगठन का मुखिया बनकर भूपेश बघेल सरकार को दबाव में रखे , किन्तु पार्टी आलाकमान ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।
बताया जा रहा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में टकराव के चलते राज्य में भाजपा की करारी हार के बाद पार्टी के
वरिष्ठ नेताओं में अब भी मै मै की तकरार है ,ज्यादातर नेता डॉ. रमन के ही विरुद्ध है , बृजमोहन अग्रवाल , ननकीराम कंवर, व अजय चंद्राकर समेत कुछ अन्य नेताओं ने नेता प्रतिपक्ष के लिए दावेदारी की थी। ये सभी नेता चाहते थे कि हर हाल में डॉ. रमन को नेता प्रतिपक्ष बनने से रोका जाए। इसमें उन्हें कामयाबी भी मिली, किन्तु डॉ. रमन अपने सबसे विश्वस्त धरमलाल कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनवाने में कामयाब हो गए। इसके बाद प्रदेश भाजपाध्यक्ष के लिए उठापटक अभी चल ही रही है। पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने जिस तरह से डॉ. रमन के विश्वस्त अधिकारियों के विरुद्ध मोर्चा खोला, उससे भी पार्टी की अंदरूनी कलह सामने आती है। बहरहाल आलाकमान द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को भाजपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद कहा जा रहा है कि प्रदेश में रमन प्रभाव को निष्प्रभाव कर दिया गया .



