एक साल में अधिकारी बाहर, दो साल से प्रभार कायम!** बोड़ला से आकाश सिंह संलग्न, लोहारा में साहू का लंबा प्रभार—आखिर प्रशासनिक कसौटी अलग-अलग क्यों?** एक आदेश ने खोल दिए प्रशासनिक व्यवस्था के कई सवाल | संलग्नीकरण का कारण स्पष्ट नहीं, नई अस्थायी व्यवस्था पर भी नजर** कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ ,,देखिये दमदारी से डी एन योगी की रिपोर्ट

एक साल में अधिकारी बाहर, दो साल से प्रभार कायम!**
बोड़ला से आकाश सिंह संलग्न, लोहारा में साहू का लंबा प्रभार—आखिर प्रशासनिक कसौटी अलग-अलग क्यों?**
एक आदेश ने खोल दिए प्रशासनिक व्यवस्था के कई सवाल | संलग्नीकरण का कारण स्पष्ट नहीं, नई अस्थायी व्यवस्था पर भी नजर**
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ ,,देखिये दमदारी से डी एन योगी की रिपोर्ट
कवर्धा। जनपद पंचायत बोड़ला के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह को करीब एक वर्ष तक जिम्मेदारी संभालने के बाद जिला पंचायत कबीरधाम में संलग्न किए जाने के फैसले ने प्रशासनिक गलियारों में सवाल खड़े कर दिए हैं।
आदेश को जारी हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन चर्चा अब भी जारी है। वजह साफ है—जिस अधिकारी ने एक साल तक क्षेत्र की पंचायत व्यवस्था, विकास योजनाओं और स्थानीय प्रशासनिक परिस्थितियों को समझा, उन्हें अचानक जिला पंचायत में संलग्न करने की प्रशासनिक जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
संलग्नीकरण आदेश में कारण स्पष्ट नहीं होने से सवाल और गहरे हो गए हैं।
** सबसे बड़ा विरोधाभास—एक साल बनाम दो साल!
एक तरफ बोड़ला में करीब एक वर्ष तक जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी को संलग्न कर दिया गया, वहीं सहसपुर लोहारा में विकास अधिकारी शिव कुमार साहू करीब दो वर्षों से जनपद पंचायत सीईओ का प्रभार संभाल रहे हैं।
यहीं से प्रशासनिक व्यवस्था की एकरूपता और समान कसौटी पर सवाल उठता है।
अगर लंबे समय तक प्रभार प्रशासनिक आवश्यकता है, तो फिर उसकी समय-सीमा क्या है?
और अगर प्रभार व्यवस्था की लगातार समीक्षा जरूरी है, तो वर्षों से चल रही ऐसी व्यवस्थाओं की समीक्षा कब होगी?
❓ 5 बड़े सवाल, जिनसे बचना मुश्किल
1. आकाश सिंह को एक साल बाद ही क्यों हटाया गया?
क्या कोई विशेष प्रशासनिक आवश्यकता थी? यदि थी तो क्या उसका कारण सार्वजनिक किया जाएगा?
2. सहसपुर लोहारा में दो साल से प्रभार क्यों?
जब अस्थायी प्रभार वर्षों तक जारी रह सकता है, तो उसकी स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?
3. प्रशासनिक फैसलों की कसौटी क्या है?
एक अधिकारी को एक साल बाद संलग्न करना और दूसरे अधिकारी को वर्षों तक प्रभार देना—क्या दोनों मामलों में समान मानदंड लागू हुए?
4. प्रभार व्यवस्था की समीक्षा कौन करेगा?
जिले में ऐसे कितने अधिकारी-कर्मचारी हैं जो लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार या अस्थायी व्यवस्था में काम कर रहे हैं?
5. बार-बार बदलाव का असर विकास कार्यों पर कितना पड़ेगा?
बोड़ला में अब योगेश वर्मा को अस्थायी रूप से सीईओ का समस्त प्रभार दिया गया है। नई व्यवस्था में लंबित विकास कार्यों और पंचायत योजनाओं की गति कितनी बनी रहती है, यह देखने वाली बात होगी।
** बोड़ला में नई व्यवस्था, लेकिन पुराने सवाल कायम
बोड़ला क्षेत्र उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा के विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इसलिए यहां होने वाले प्रशासनिक बदलाव पर क्षेत्र की स्वाभाविक रूप से नजर रहती है।
हालांकि, आकाश सिंह के संलग्नीकरण को विजय शर्मा से जोड़ने का कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है, इसलिए इस संबंध में चल रही चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल असली मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और एकरूपता का है।
आदेश हो गया… अब जवाब का इंतजार
प्रशासनिक फेरबदल शासन की सामान्य प्रक्रिया है। कार्यहित में अधिकारी की जिम्मेदारी बदली जा सकती है। लेकिन जब एक तरफ करीब एक साल बाद संलग्नीकरण हो और दूसरी तरफ करीब दो वर्षों से प्रभार व्यवस्था चलती रहे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनता जानना चाहती है—प्रशासनिक फैसलों का पैमाना आखिर क्या है?
एक साल में संलग्नीकरण… दो साल से प्रभार…
क्या जिले में प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक ही कसौटी है?
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़,, देखिए दमदारी से डी एन योगी की रिपोर्ट




