Uncategorized

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट 🌹 आजादी के अमर सिपाही को शत-शत नमन 🌹 *स्वतंत्रता सेनानी पंडित तुलसी प्रसाद मिश्रा जी की पुण्यतिथि पर होगा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन* राजनांदगांव/छुरिया (छत्तीसगढ़):

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

🌹 आजादी के अमर सिपाही को शत-शत नमन 🌹

*स्वतंत्रता सेनानी पंडित तुलसी प्रसाद मिश्रा जी की पुण्यतिथि पर होगा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन*

राजनांदगांव/छुरिया (छत्तीसगढ़):

6 मई 2026 को ग्राम चिरचारी कला,विकास खंड छुरिया, जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़ के गौरव, स्वतंत्रता संग्राम के समर्पित सेनानी एवं शिक्षा और समाज सुधार के अग्रदूत पंडित तुलसी प्रसाद मिश्रा जी की पुण्यतिथि पर प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी क्षेत्रवासियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं सामाजिक संगठनों के द्वारा उनके अद्वितीय योगदान को नमन व स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। पंडित तुलसी प्रसाद मिश्रा जी का जन्म 9 नवंबर 1903 को ग्राम चिरचारी कला में पं. अयोध्या प्रसाद मिश्रा एवं श्रीमती बिसाहिन मिश्रा के घर हुआ था। बाल्यकाल से ही उनमें शिक्षा और समाज सेवा के प्रति गहरी लगन थी। वर्ष 1914 में मात्र 7वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने अपने गांव में निःशुल्क पाठशाला प्रारंभ कर शिक्षा का अलख जगाया, जो उनके दूरदर्शी व्यक्तित्व को दर्शाता है।स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनके समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1929 में उन्होंने शिक्षक की नौकरी से त्यागपत्र देकर देश की आजादी के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया। उन्होंने वर्धा आश्रम में महात्मा गांधी जी के सान्निध्य में रहकर सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को आत्मसात किया और इन्हीं मूल्यों के आधार पर समाज में जन-जागरण का कार्य किया।

छुईखदान शहीद नगर में उन्होंने ठाकुर प्यारेलाल सिंह एवं कुंज बिहारी चौबे जैसे महान नेताओं के साथ मिलकर स्वतंत्रता आंदोलन को गति प्रदान की। इसके साथ ही उन्होंने विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में सक्रिय भाग लेकर समाज में समता और सहयोग की भावना को मजबूत किया।

पंडित मिश्रा जी का जीवन त्याग और सादगी का अनुपम उदाहरण रहा। रानी सुंदरिया बाई द्वारा प्रदत्त उच्च पद को उन्होंने ठुकरा दिया और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मिलने वाली पेंशन व ताम्रपत्र भी स्वीकार नहीं किया। उनका यह त्याग उन्हें एक सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में स्थापित करता है।

6 मई 2010 को उनके निधन के साथ एक युग का अंत हुआ, लेकिन उनके आदर्श आज भी समाज को प्रेरित कर रहे हैं। राजनांदगांव जिले के इस गुमनाम नायक ने शिक्षा, त्याग और अहिंसा के माध्यम से देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

आज उनकी पुण्यतिथि पर समस्त क्षेत्रवासी उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

“ऐसे महान सपूतों की वजह से ही आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं।”

उक्त जानकारी शिक्षक देवेंद्र साहू ने दी।

Spread the love

Related Articles

Back to top button