कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट 📰 राजनीति: सेवा नहीं, स्वार्थ का अखाड़ा बन चुकी है अब राजनीति का मकसद जनता नहीं, केवल सत्ता और संपत्ति है > “राजनीति और शुचिता अब एक-दूसरे के विरोधी शब्द बन चुके हैं।”
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट
📰 राजनीति: सेवा नहीं, स्वार्थ का अखाड़ा बन चुकी है
अब राजनीति का मकसद जनता नहीं, केवल सत्ता और संपत्ति है
> “राजनीति और शुचिता अब एक-दूसरे के विरोधी शब्द बन चुके हैं।”
राजनीति आज जनसेवा का माध्यम नहीं रही। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि अब यह “कम समय में कमाने और पुश्त-दर-पुश्त सुख-सुविधा जुटाने” का सबसे आसान साधन बन चुकी है। राजनीति का यह ऐसा हमाम है, जिसमें हर कोई नंगा होकर डुबकी लगाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस व्यक्ति पर 80 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया, उसी को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बना दिया — यह उदाहरण बताने के लिए काफी है कि सत्ता की गणित में नैतिकता की कोई जगह नहीं बची।
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार ने भी मानो भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किए। गोबर, कोयला, आबकारी, लोक सेवा आयोग — हर विभाग से उगाही की गंध आती रही। आज हाल यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा और तत्कालीन आबकारी मंत्री जेल की हवा खा रहे हैं।
लेकिन दुर्भाग्य यह है कि कांग्रेस पार्टी ने ऐसे नेताओं को दरकिनार करने की बजाय उन्हें और ऊँची जिम्मेदारियाँ सौंप दीं। उत्तर प्रदेश और असम चुनावों में भूपेश बघेल को प्रमुख भूमिका दी गई थी, और अब बिहार में भी वही दोहराया जा रहा है। यह स्पष्ट करता है कि राजनीति में अब योग्यता नहीं, जोड़-तोड़ और “प्रबंधन कौशल” ही असली पूंजी है।
बीजेपी पर भले ही विपक्ष आरोप लगाता हो, लेकिन कांग्रेस को भी अपना दामन साफ रखना होगा। आज जनता यह भली-भांति समझ चुकी है कि “भ्रष्टाचार का रंग” किसी पार्टी का नहीं होता — यह सत्ता का स्थायी साथी बन चुका है।
राजनीति अब सेवा नहीं, बल्कि स्वार्थ का कारोबार बन चुकी है।
यह वह पेशा है, जहाँ जनता केवल वोट देने तक सीमित है, और नेता — जनता के नाम पर अपना साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं।


