
पंडरिया क्षेत्र फसल की दृष्टि से प्रदेश में स्थान सबसे ऊपर है, आशीष जैन
पडरिया यहां अनाज धान, चना, तिवरा, गेंहू, अरहर, मटर, सरसों, मक्का, तिल्ली, मक्का, अरहर, कोदो, के अलावा, वनोपज बड़े मात्रा में पैदावार होता है, बाजार नही मिलने के कारण सस्ती से सस्ती दर अपना माल बेचने को मजबूर हैं, कृषि उपज मंडी तो है, लम्बे समय से अनाज की खरीदारी मंडी प्राँगण में नही हो रही है।
कबीरधाम जिले का सबसे बड़ा विकासखण्ड ये अनुसूचितजाति, जनजाति पिछड़ा बाहुल्य छेत्र है, यह छेत्र पूरी तरह से आजीविका के लिए कृषि पर ही निर्भर है, आदिवासी अपना अनाज, वनोपज, आज भी विनिमय पद्धति से बेचते हैं, और हम चांद सितारों में घर बनाने की सपना संजोये फिर रहे हैं।
आदिवासियों को अपने उपज का उचित दाम नही मिल पा रहा है, अनुसूचितजाति अन्य गरीब तपका पिछड़ा वर्ग के किसान को अपनी मेहनत की कमाई का सही दाम मंडी नही होने से मिल रहा है, सामान्य वर्ग के किसान भी मजबूरन अनाज व्यापारी के घर जा व्यापारी के दाम पर अपनी फसल बेचता है,
इस मुद्दे पर राजनीतिक व किसान संगठनों की चुप्पी भी संदेहजनक है।
पंडरिया अनाज मंडी का इतिहास गौरवशाली रहा है, लेकिन कुछ व्यापारियों ने सिंडिकेट बनाकर यहाँ वर्चस्व जमा लिया है, जिसके चलते यहाँ अनाज की बोली होना बंद हो गयी है, इन्हें पूर्ववर्ती सरकार का संरक्षण प्राप्त रहा है,
आज पंडरिया के आमजन/व्यापारियों/किसानों को समझना होगा कि सिर्फ दुकाने बना लेने से व्यापार नही बढेगा, किसान जब अपनी फसल बाहर के मण्डियों में जाकर बेचेगा, तो ज्यादातर अपनी जरूरत की खरीदी भी वही से कर लेता है।
कुछ पूर्व व वर्तमान मंडी कर्मचारीयो की भूमिका सही नही रही है, मंडी में अनाज नीलम नही होने और किसानों को व शासन को नुकसान पहुंचाने के लिये इन्हें भी कुछ हद तक जिम्मेदार माना जा सकता है।
पंडरिया के किसानों व सामान्य व्यपारियो द्वारा समय-समय पर मंडी शुरू करने की चर्चा की जाती है, पर रसूकदारो द्वारा बात दबा दी जाती है।
प्राप्त कुछ वर्षो टेक्स से सभी सच्चाई दुध और पानी की तरह सामने आ जायेगी, पिछली सरकार के मंत्री, विधायक, मुख्यमंत्री सभी ने पंडरिया कृषि उपज मंडी समिति को चालू करने की घोषणा किये थे, किस कारण मंडी प्रांगण में नीलामी से अनाज खरीदी आरंभ नही हुआ है, यह बात सामने नही आया है,
पंडरिया के समकक्ष रहे कवर्धा, मुंगेली, लोरमी मंडी में जहाँ हजारो क्विंटल अनाज की आवक होती है, वही पंडरिया मंडी में अनाज खरीदी सालो से बंद पड़ी है,
आसपास के नगर जैसे लोरमी, कवर्धा, मुंगेली से तुलना की जाये तो व्यवसायिक दृष्टि से पंडरिया पिछड़ा हुआ लगता है, तो इसका कारण यहाँ की अनाज मंडी का सफलतापूर्वक संचालित न होना है।
*आशीष जैन* ने ये विज्ञप्ति जारी करते हुवे वर्तमान सरकार से अपेक्षा की है कि किसानों व पंडरिया छेत्र के हितों को ध्यान में रखकर इस दिशा काम हो।




