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कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट खबर भले निरंतर नहीं, अपितु रसदार ज़रूर है 👀🌹👀💗👀 एक को माई का, एक को मौसी का — अतीत की कहावत फिर हुई चरितार्थ ! कबीरधाम जिले की राजनीति में एक बासी और एक ताज़ा घटनाक्रम चर्चा का बड़ा विषय बनता जा रहा है। सम्माननीय पाठकगण, जय जोहार, नमस्कार देश की सबसे पुरानी और बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के भीतर जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक नेतृत्व, नीति और अनुशासन को लेकर उठ रहे सवाल अब संगठन के अंदर ही धुएं के गुबार की तरह फैलते दिखाई दे रहे हैं। कबीरधाम कांग्रेस संगठन में भीतरखाने लिए जा रहे फैसले अब कार्यकर्ताओं के मन में असंतोष, पीड़ा और भेदभाव की भावना को जन्म दे रहे हैं। यह सर्वविदित है कि किसी भी संगठन में अच्छे-बुरे लोग हो सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति कानूनन दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक कार्यवाही होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। मगर सवाल यहां दोहरे मापदंड का उठ रहा है… विगत दिनों कवर्धा जिले के लोहारा ब्लॉक के तत्कालीन कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पर अनैतिक आचरण के मामले में कानूनी कार्यवाही के बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। मामला गंभीर था, इसलिए संगठन ने तत्काल कठोर कदम उठाया। लेकिन वर्तमान में पांडातराई थाना क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर प्रकरण में किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष रवि चंद्रवंशी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हुई, राजधानी रायपुर से गिरफ्तारी हुई और वे न्यायिक अभिरक्षा में जेल में भी बंद हैं। इसके बावजूद अब तक न कोई स्पष्ट नोटिस, न निष्कासन और न ही कोई सार्वजनिक संगठनात्मक कार्यवाही सामने आई है। ऐसे में बड़ा सवाल उठना लाजिमी है कि — क्या पार्टी में कार्यवाही व्यक्ति की पहुंच, पद और संरक्षण देखकर तय होती है? क्या नियम अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग हैं? क्या संगठन में सामान्य कार्यकर्ता और प्रभावशाली पदाधिकारियों के लिए अलग पैमाना अपनाया जा रहा है? यह मामला अब कांग्रेस संगठन के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा और कौतूहल का विषय बन चुका है। संगठन के अनेक कार्यकर्ता स्पष्ट और समान कार्यवाही की प्रतीक्षा में हैं। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है। कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट
खबर भले निरंतर नहीं, अपितु रसदार ज़रूर है
👀🌹👀💗👀
एक को माई का, एक को मौसी का — अतीत की कहावत फिर हुई चरितार्थ !
कबीरधाम जिले की राजनीति में एक बासी और एक ताज़ा घटनाक्रम चर्चा का बड़ा विषय बनता जा रहा है।
सम्माननीय पाठकगण,
जय जोहार, नमस्कार
देश की सबसे पुरानी और बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के भीतर जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक नेतृत्व, नीति और अनुशासन को लेकर उठ रहे सवाल अब संगठन के अंदर ही धुएं के गुबार की तरह फैलते दिखाई दे रहे हैं।
कबीरधाम कांग्रेस संगठन में भीतरखाने लिए जा रहे फैसले अब कार्यकर्ताओं के मन में असंतोष, पीड़ा और भेदभाव की भावना को जन्म दे रहे हैं।
यह सर्वविदित है कि किसी भी संगठन में अच्छे-बुरे लोग हो सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति कानूनन दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक कार्यवाही होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
मगर सवाल यहां दोहरे मापदंड का उठ रहा है…
विगत दिनों कवर्धा जिले के लोहारा ब्लॉक के तत्कालीन कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पर अनैतिक आचरण के मामले में कानूनी कार्यवाही के बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया था। मामला गंभीर था, इसलिए संगठन ने तत्काल कठोर कदम उठाया।
लेकिन वर्तमान में पांडातराई थाना क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर प्रकरण में किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष रवि चंद्रवंशी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हुई, राजधानी रायपुर से गिरफ्तारी हुई और वे न्यायिक अभिरक्षा में जेल में भी बंद हैं।
इसके बावजूद अब तक न कोई स्पष्ट नोटिस, न निष्कासन और न ही कोई सार्वजनिक संगठनात्मक कार्यवाही सामने आई है।
ऐसे में बड़ा सवाल उठना लाजिमी है कि —
क्या पार्टी में कार्यवाही व्यक्ति की पहुंच, पद और संरक्षण देखकर तय होती है?
क्या नियम अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग हैं?
क्या संगठन में सामान्य कार्यकर्ता और प्रभावशाली पदाधिकारियों के लिए अलग पैमाना अपनाया जा रहा है?
यह मामला अब कांग्रेस संगठन के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा और कौतूहल का विषय बन चुका है।
संगठन के अनेक कार्यकर्ता स्पष्ट और समान कार्यवाही की प्रतीक्षा में हैं। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है।
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

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