कवर्धा की राजनीति में उबाल, भाजपा में कौन है विभीषण,,?जिसकी चाय दुकानों में हो रही है चर्चा, देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ !भाजपा को बदनाम करने की साज़िश? कौन है भीतर बैठा “विभीषण” ? आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय जनता पार्टी जैसी अनुशासित, विचारधारा-आधारित पार्टी को आधी-अधूरी, भ्रामक और ऊल-जुलूस जानकारी देकर बदनाम करने की कोशिश कौन कर रहा है? क्या यह असंतोष की आग में जलता कोई स्वार्थी चेहरा है? पद, टिकट या प्रभाव न मिलने की खीझ है? या फिर विपक्षी एजेंडे को भीतर से हवा देने की साज़िश? यह साफ़ है कि जो व्यक्ति या समूह संगठन की छवि को नुकसान पहुँचाता है मीडिया और सोशल मीडिया में भ्रम फैलाता है बिना तथ्य पार्टी नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करता है वह पार्टी का नहीं, अपने स्वार्थ का सेवक है। भाजपा कार्यकर्ता सवाल पूछ रहे हैं क्या अब अंदर बैठे गद्दारों की पहचान ज़रूरी नहीं? क्या संगठन की साख से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए? क्या “अनुशासन और राष्ट्रहित” केवल नारा बनकर रह जाएगा? अब चुप्पी नहीं भाजपा की ताकत उसका कार्यकर्ता उसका अनुशासन और उसकी विचारधारा है जो भी इसे तोड़ने की कोशिश करेगा, वह चाहे कितना भी भीतर क्यों न बैठा हो — बेनकाब होना तय है। अब समय है सच सामने लाने का। भ्रम नहीं, प्रमाण बोलेंगे। भाजपा बदनाम नहीं होगी — गद्दार उजागर होंगे। कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

D.N. Yogi

ByD.N. Yogi

Feb 26, 2026

कवर्धा की राजनीति में उबाल, भाजपा में कौन है विभीषण,,?जिसकी चाय दुकानों में हो रही है चर्चा,

देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़

!भाजपा को बदनाम करने की साज़िश?
कौन है भीतर बैठा “विभीषण” ?
आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि
भारतीय जनता पार्टी जैसी अनुशासित, विचारधारा-आधारित पार्टी को
आधी-अधूरी, भ्रामक और ऊल-जुलूस जानकारी देकर बदनाम करने की कोशिश कौन कर रहा है?
क्या यह
असंतोष की आग में जलता कोई स्वार्थी चेहरा है?
पद, टिकट या प्रभाव न मिलने की खीझ है?
या फिर विपक्षी एजेंडे को भीतर से हवा देने की साज़िश?
यह साफ़ है कि
जो व्यक्ति या समूह
संगठन की छवि को नुकसान पहुँचाता है
मीडिया और सोशल मीडिया में भ्रम फैलाता है
बिना तथ्य पार्टी नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करता है
वह पार्टी का नहीं, अपने स्वार्थ का सेवक है।
भाजपा कार्यकर्ता सवाल पूछ रहे हैं
क्या अब अंदर बैठे गद्दारों की पहचान ज़रूरी नहीं?
क्या संगठन की साख से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?
क्या “अनुशासन और राष्ट्रहित” केवल नारा बनकर रह जाएगा?
अब चुप्पी नहीं
भाजपा की ताकत
उसका कार्यकर्ता
उसका अनुशासन
और उसकी विचारधारा है
जो भी इसे तोड़ने की कोशिश करेगा,
वह चाहे कितना भी भीतर क्यों न बैठा हो — बेनकाब होना तय है।
अब समय है सच सामने लाने का।
भ्रम नहीं, प्रमाण बोलेंगे।
भाजपा बदनाम नहीं होगी — गद्दार उजागर होंगे।
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

 

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