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सहसपुर लोहारा में विकास की पोल खुली! विधायक के गृह ग्राम में जर्जर सी.सी. रोड, नियम विरुद्ध तकनीकी सहायक से कराया गया मूल्यांकन कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

सहसपुर लोहारा में विकास की पोल खुली! विधायक के गृह ग्राम में जर्जर सी.सी. रोड, नियम विरुद्ध तकनीकी सहायक से कराया गया मूल्यांकन

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

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शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए संकल्पित मानी जाने वाली पंडरिया विधायक भावना बोहरा की छवि एक सक्रिय और विकासोन्मुख जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित रही है। क्षेत्र में अनेक विकास कार्य उनके प्रयासों से प्रारंभ हुए हैं, लेकिन सहसपुर लोहारा विकासखंड अंतर्गत आने वाले उनके गृह ग्राम में ही हुए कुछ निर्माण कार्य अब विकास की गुणवत्ता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व सरपंच के घर से अमृत सरोवर की ओर बने सी.सी. रोड एवं नाली निर्माण कार्य (लगभग एक वर्ष पूर्व) की हालत चिंताजनक है। सड़क में कई स्थानों पर दरारें स्पष्ट रूप से नजर आ रही हैं, सड़क और नाली के बीच घास-फूस उग आई है, जबकि नाली में जल बहाव की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के महज एक साल के भीतर ऐसी स्थिति बनना गंभीर लापरवाही और गुणवत्ता की अनदेखी की ओर इशारा करता है।

नियमों के विरुद्ध मूल्यांकन का आरोप
सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि मिली जानकारी अनुसार, इन निर्माण कार्यों का मूल्यांकन और मापन (Measurement Book) उप अभियंता (Sub Engineer) के बजाय मनरेगा के तकनीकी सहायक द्वारा किया गया है। जबकि तकनीकी दिशा-निर्देशों के अनुसार सी.सी. रोड एवं नाली जैसे संरचनात्मक कार्यों का मूल्यांकन सक्षम तकनीकी अधिकारी द्वारा किया जाना अनिवार्य माना जाता है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो इसे नियमों के विरुद्ध प्रक्रिया माना जाएगा।

नागरिक सूचना पटल भी नदारद
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि संबंधित निर्माण स्थलों पर एक भी नागरिक सूचना पटल नहीं लगाया गया है। नियमानुसार किसी भी सार्वजनिक निर्माण कार्य में लागत, स्वीकृति वर्ष, कार्य एजेंसी, तकनीकी अधिकारी और योजना का विवरण प्रदर्शित किया जाना आवश्यक होता है। सूचना पटल का अभाव पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है।

विधायक की मंशा बनाम मैदानी हकीकत
स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि विधायक भावना बोहरा की नीयत और विकास के प्रति प्रतिबद्धता पर उन्हें कोई संदेह नहीं है, लेकिन मैदानी स्तर पर कार्य कर रही निर्माण एजेंसियों और निगरानी तंत्र की लापरवाही के कारण विकास की छवि धूमिल हो रही है। ग्रामीणों का यहां तक कहना है कि यदि विकास का वास्तविक मॉडल देखना हो, तो रणवीरपुर जैसे गांवों को उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है, जबकि गृह ग्राम में ही कार्यों की यह स्थिति चिंताजनक है।

जांच समिति गठित करने की मांग तेज
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि
सी.सी. रोड और नाली निर्माण की स्वतंत्र तकनीकी जांच,
मूल्यांकन प्रक्रिया की वैधानिक समीक्षा,
उप अभियंता के स्थान पर तकनीकी सहायक से मापन कराए जाने के कारणों की जांच,
तथा नागरिक सूचना पटल न लगाने के मामलों
को लेकर जांच समिति गठित की जाए। दोष सिद्ध होने पर संबंधित निर्माण एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में विकास कार्य सिर्फ कागजों में नहीं बल्कि गुणवत्ता और भरोसे के साथ जमीन पर दिखाई दें।

ग्रामीणों का मानना है कि सख्त जांच और पारदर्शी कार्रवाई से ही विकास के प्रति विधायक की सोच को सही मायनों में जमीन पर उतारा जा सकता है।

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