पालकी शोभा यात्रा धार्मिक कार्य में राजनीति या एकाधिकार ?*

कवर्धा -: हिंदू धर्म में पेड़,पौधा,पहाड़,नदी प्रत्येक जीव जंतु को भगवान का रूप मानकर यथोस्थित में पूजा किया जाता है,मगर स्थानीय स्तर पर पालकी सेवा द्वारा धर्म के नाम पर एकाधिकार एवं राजनीति कर रहे हैं,श्रावण मास दिनांक 12/8/2024 को बूढ़ा महादेव मंदिर से पालकी एवम कलश यात्रा निकालने का कार्यक्रम बनाया गया है इस बात को लेकर बैनर पोस्टर,पैंपलेट भी छपवाया गया है क्षेत्र में बटवाया जा रहा है। हिंदू अपने धर्म गुरु को भगवान का रूप मानते है तो फिर लोगो के भावनाओ के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है,इनके द्वारा बांटे जा रहे पैंपलेट में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद  महराज जी का फोटो नही लगाया गया है,जबकि कवर्धा से लेकर नागपुर महाराष्ट्र तक पूरी शंकराचार्य के आधीन है लाखो के संख्या में उनके भक्त,अनुयाई हैं,उनके भावनाओ के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है,इस पैंपलेट में पुर्व शंकराचार्य स्वरूपानंद महराज जी,  एवं शंकराचार्य वर्विमुक्तेश्वरानंद महराज जी का फोटो है तो पूरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी का फोटो क्यों नही लग सकता ? स्वामी निश्चलानंद महाराज जी का फोटो नही डालना उनके अनुवाईयो के आस्था पर चोट तो नहीं क्या यह एकाधिकार या राजनीति तो नहीं खेला जा रहा है इससे क्षेत्र की जनता जानना चाहती है। आखिर कौन है जो धर्म में अधर्म कार्य में लगा

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