कवर्धा

किसानों की कमर तोड़ने वाले तीन काले कृषि कानून को प्रधानमंत्री वापस ले – नीलू चंद्रवंशी

किसानों की कमर तोड़ने वाले तीन काले कृषि कानून को प्रधानमंत्री वापस ले – नीलू चंद्रवंशी

कवर्धा,,,कुंडा :- दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में प्रदेश प्रभारी आदरणीय *पी. एल. पुनिया जी,* मुख्यमंत्री आदरणीय *श्री भूपेश बघेल जी,* प्रदेश अध्यक्ष आदरणीय *श्री मोहन मरकाम जी, कैबिनेट मंत्री *मोहम्मद अकबर जी* के निर्देशानुसार कुंडा ब्लाक में *जिला अध्यक्ष नीलू चंद्रवंशी* द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस ब्लाक काँग्रेस कुंडा के अध्यक्ष उत्तरा दिवाकर , प्रभारी श्री रमाकांत शुक्ला जी, अमरजीत सलूजा जी, होरीलाल सिंगरौल जी, आरती सुमन जी, विनोद रजक जी की उपस्तिथि में लिया गया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला अध्यक्ष नीलू चंद्रवंशी ने कहा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से पूछना चाहते है कि हमारे देश के किसानो को, अन्नदाताओं को ऐसा क्या समस्या आ गया, ऐसा क्या तकलीफ आ गया कि देश के किसानों को अपने खेती किसानी को छोड़ के, अपने घर परिवार को छोड़ के, अपने बीवी बच्चे को छोड़ के दिल्ली की सड़क पर धरना आंदोलन में बैठना पड़ा वहैं इसका जवाब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देना चाहिए, आपने किसानों के विरुद्ध में तीन काले कानून लाये हैं ये तीनो काले कानून किसानों का कमर तोड़ने वाले कानून है आपके ये कानून से किसान बर्बाद होने वाले हैं आप इस कानून के माध्यम से किसानों को निजी उद्योगपतियों के हाथ मे बेचना चाहते हैं, ”कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत अश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020”. इस कानून के संदर्भ में सरकार का कहना है कि वह किसानों और निजी कंपनियों के बीच में समझौते वाली खेती का रास्ता खोल रही है. इसे सामान्य भाषा में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कहते है.
आप किसानों की जमीन को एक निश्चित राशि पर एक पूंजीपति या ठेकेदार किराये पर लेगा और अपने हिसाब से फसल का उत्पादन कर बाजार में बेचेगा. यह तो किसानों को बंधुआ मजदूर बनाने की शुरुआत जैसी है. चलिए हम मान लेते हैं कि देश के कुछ किसान कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग चाहते हैं. लेकिन, कानून में किसानों को दोयम दर्जे का बना कर रख दिया गया है.

सबसे अधिक कमजोर तो किसानों को कॉन्‍ट्रैक्ट फार्मिंग में किसान और ठेकेदार के बीच में विवाद निस्तारण के संदर्भ में है. विवाद की स्थिति में जो निस्तारण समिति बनेगी उसमें दोनों पक्षों के लोगों को रखा तो जाएगा. लेकिन, हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि पूंजी से भरा हुआ इंसान उस समिति में महंगे से महंगा वकील बैठा सकता है और फिर किसान उसे जवाब नहीं दे पाएगा. इस देश के अधिकतर किसान तो कॉन्ट्रैक्ट पढ़ भी नहीं पाएंगे. इसप्रकार ये तीनो कानून किसान को बंधुवा मजदूर बनाने वाले कानून है इसलिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से हम मांग करते हैं कि इन तीनो काले कानून को वापस ले और देश में आंदोलन कर रहे किसानों की मांग अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाकर किसानो को नुन्तम समर्थन मूल्य की कीमत देना अनिवार्य करें।

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