: गोपाष्टमी पर्व कैसे मनाएं, क्या है इसका महत्व, जानिए किसने शुरू की थी गौ चारण की प्रथा डी एन योगी कबीर क्रांति कवर्धा,,,पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गौ चारण लीला शुरू की थी। कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन मां यशोदा ने भगवान कृष्ण को गौ चराने के लिए जंगल भेजा था। इस दिन गो, ग्वाल और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करने का महत्व है। हिन्दू धर्म में गाय को माता का स्थान दिया गया है। अत: गाय को गौ माता भी कहा जाता है। आइए जानें कैसे मनाएं गोपाष्टमी पर्व? * कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन प्रात:काल में उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नानादि करके स्वच्छ धुले हुए वस्त्र धारण करें। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार दिवाली के ठीक बाद आने वाली कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। : पंचदेव मंदिर में गौमाता की पूजा कर मनाई गई गौपाष्टमी पर्व कवर्धा ,,ग्राम सारंग पुर खुर्द स्थित श्री पंचदेव मंदिर में गौपाष्टमी पर्व मनाया गया मंदिर परिसर में ही गौमाता की पूजन कर खिचड़ी खिलाई गई इस अवसर पर डॉ गोवर्धन सिंह ठाकुर,प्रकाश वर्मा, धनेश्वर नाथ योगी,चुनवा खान, मोहन अग्रवाल, गणेश नाथ योगी, गंगोत्री योगी, तारिणी ठाकुर, पार्वती सोनी,दीपा गुप्ता, रिमझिम गुप्ता, डॉ मनोहर चंद्रवंशी,दसरथ सोनी, नंदकुमार शर्मा,कमल कांत गुप्ता, हेमंत केशरी, बलदाऊ केशरी, अमित शर्मा, देवव्रत शर्मा, पुजारी कृष्ण कांत शर्मा, के साथ साथ आस पास के ग्रामीण गौमाष्टमी पर्व मनाने भारी संख्या गौमाता के भक्त पंचदेव मंदिर पहुंचे थे शनिवार को छ:ग: राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष माननीय महामंडलेश्वर राजेश्री डॉ. महंत रामसुंदर दास जी महाराज पीठाधीश्वर श्री दूधाधारी मठ रायपुर (केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त) कवर्धा दौरा पर रहे, इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के अनेक गौशाला का निरीक्षण किया,और गौमाता भक्तों को गौमाष्टमी ,पर्व मनाने का सुझाव दिये थे आज ईसी का परिणाम है ,पंचदेव मंंदिर मे गौमाष्टमी पर्व मनाया गया Spread the love Post navigation कप्तान शलभ कुमार सिन्हा ने कुकदुर थाना का अकस्मात निरीक्षण किया भाजपा का दो दिवसीय मंडल स्तरीय प्रशिक्षण शिविर हेतु कार्ययोजना बनाने हुई बैठक