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एफआईआर के बाद भी कार्रवाई शून्य — पथर्रा राशन दुकान मारपीट कांड में पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल** कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़

एफआईआर के बाद भी कार्रवाई शून्य — पथर्रा राशन दुकान मारपीट कांड में पुलिस-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल**

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़

कवर्धा**कबीरधाम जिले के ग्राम पथर्रा स्थित शासकीय राशन दुकान में हितग्राही के साथ हुई बेरहमी से मारपीट और लूट के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक न तो पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई की है और न ही प्रशासन अथवा खाद्य विभाग ने संचालक पर कोई कदम उठाया है।

यह वही मामला है जिसमें राशन मांगने पर दुकान संचालक आकाश चंद्रवंशी द्वारा अपने परिजनों के साथ मिलकर एक हितग्राही की पिटाई करने, जान से मारने की धमकी देने और सोने की चैन व 30 हजार रुपये नगद छीनने के गंभीर आरोप लगे हैं।

पीड़ित द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन घटना को कई दिन बीत जाने के बाद भी न आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है, न लूट की बरामदगी और न ही किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई।

पीड़ित का आरोप — आरोपी खुलेआम घूम रहे, मिल रही धमकी

पीड़ित का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आरोपी खुलेआम गांव में घूम रहे हैं, जिससे उसे और उसके परिवार को भय का माहौल झेलना पड़ रहा है। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रभावशाली होने के कारण आरोपी कार्रवाई से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

लाइसेंस अब भी बरकरार, दुकान चालू

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस राशन दुकान को लेकर इतनी गंभीर घटना सामने आई, उसका लाइसेंस अब तक निलंबित या निरस्त नहीं किया गया है और दुकान यथावत संचालित हो रही है।
इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

ग्रामीणों में रोष, प्रशासन पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यदि —

एफआईआर के बाद भी आरोपी सुरक्षित हैं

लूट और मारपीट जैसे गंभीर मामलों में भी कार्रवाई नहीं होती

और दोषी संचालक को संरक्षण मिलता है

तो गरीब और जरूरतमंद लोग न्याय की उम्मीद किससे करें?

अब सवाल सीधे-सीधे यह हैं —

क्या राशन दुकान संचालक कानून से ऊपर हैं?

क्या गरीब हितग्राहियों के साथ मारपीट भी अब “सामान्य मामला” बन गई है?

क्या पुलिस और खाद्य विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं?

ग्रामीणों और पीड़ित की मांग

पीड़ित और ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि —

आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए

राशन दुकान संचालक का लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाए

और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो

अब यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की पिटाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है।

> देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब जागता है — या फिर गरीबों के हक की यह आवाज भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।

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