कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ धान खरीदी में दोहरा चरित्र? तीन केंद्रों पर एफआईआर, 106 केंद्रों पर प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी! देखिए डी. एन. योगी की रिपोर्ट कवर्धा। जिले की धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आधिकारिक सोसायटी रिपोर्ट के अनुसार जिले के 108 धान उपार्जन केंद्रों में 63,72,351.20 क्विंटल धान की खरीदी हुई, लेकिन 59,063.36 क्विंटल धान का उठाव अब भी लंबित दर्ज है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले के अनेक केंद्रों में हजारों क्विंटल धान का उठाव शेष है, तब एफआईआर केवल सहसपुर लोहारा, बम्हनी और पेंड्रीकला केंद्रों में ही क्यों? क्या नियम सिर्फ तीन केंद्रों पर लागू होते हैं या बाकी केंद्रों के लिए अलग व्यवस्था है? रिपोर्ट के अनुसार कामठी (3,326.36 क्विंटल), पेंड्रीकला (2,674.98), उसरवाही (2,373.14), समनापुर बम्हनी (2,186.52), सुरजपुरा (2,144.25) सहित कई केंद्रों में हजारों क्विंटल धान का उठाव शेष है। इसके अलावा कुकदुर, बिडौरा-रक्से, बोदा (तरेगांव जंगल), बैजलपुर, जुनवानी, रणवीरपुर, सरईसेत, गोछियां, सारंगपुर, बोड़ला सहित अनेक केंद्रों में भी सैकड़ों से हजारों क्विंटल धान लंबित दर्ज है। बड़ा सवाल यदि धान का लंबित उठाव ही एफआईआर का आधार है, तो बाकी 106 केंद्रों पर समान कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या सभी मामलों की निष्पक्ष जांच हुई है या कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग अपनाया गया? प्रशासन भले ही 99.07% धान उठाव का दावा करे, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 59 हजार क्विंटल से अधिक धान लंबित होना भी एक गंभीर तथ्य है, जिसे केवल प्रतिशत के आंकड़ों से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसानों और आम नागरिकों की मांग है कि प्रशासन सभी उपार्जन केंद्रों की समान जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और यदि कहीं अनियमितता है तो नियमों के अनुसार समान कार्रवाई सुनिश्चित करे। कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ “सवाल जनता के… जवाब प्रशासन से!” डी. एन. योगी, संपादक

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धान खरीदी में दोहरा चरित्र? तीन केंद्रों पर एफआईआर, 106 केंद्रों पर प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी!
देखिए डी. एन. योगी की रिपोर्ट
कवर्धा। जिले की धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आधिकारिक सोसायटी रिपोर्ट के अनुसार जिले के 108 धान उपार्जन केंद्रों में 63,72,351.20 क्विंटल धान की खरीदी हुई, लेकिन 59,063.36 क्विंटल धान का उठाव अब भी लंबित दर्ज है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले के अनेक केंद्रों में हजारों क्विंटल धान का उठाव शेष है, तब एफआईआर केवल सहसपुर लोहारा, बम्हनी और पेंड्रीकला केंद्रों में ही क्यों? क्या नियम सिर्फ तीन केंद्रों पर लागू होते हैं या बाकी केंद्रों के लिए अलग व्यवस्था है?
रिपोर्ट के अनुसार कामठी (3,326.36 क्विंटल), पेंड्रीकला (2,674.98), उसरवाही (2,373.14), समनापुर बम्हनी (2,186.52), सुरजपुरा (2,144.25) सहित कई केंद्रों में हजारों क्विंटल धान का उठाव शेष है। इसके अलावा कुकदुर, बिडौरा-रक्से, बोदा (तरेगांव जंगल), बैजलपुर, जुनवानी, रणवीरपुर, सरईसेत, गोछियां, सारंगपुर, बोड़ला सहित अनेक केंद्रों में भी सैकड़ों से हजारों क्विंटल धान लंबित दर्ज है।
बड़ा सवाल
यदि धान का लंबित उठाव ही एफआईआर का आधार है, तो बाकी 106 केंद्रों पर समान कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या सभी मामलों की निष्पक्ष जांच हुई है या कार्रवाई का पैमाना अलग-अलग अपनाया गया?
प्रशासन भले ही 99.07% धान उठाव का दावा करे, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में 59 हजार क्विंटल से अधिक धान लंबित होना भी एक गंभीर तथ्य है, जिसे केवल प्रतिशत के आंकड़ों से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
किसानों और आम नागरिकों की मांग है कि प्रशासन सभी उपार्जन केंद्रों की समान जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और यदि कहीं अनियमितता है तो नियमों के अनुसार समान कार्रवाई सुनिश्चित करे।
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
“सवाल जनता के… जवाब प्रशासन से!”
डी. एन. योगी, संपादक




