क्या अधिकारियों के लिए अपनी जान जोखिम में डालेंगे नगर सैनिक?** मुख्यालय का पुनः नामांकन सहमति पत्र वायरल, एक शर्त ने खड़े किए बड़े सवाल** कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट** नगर सेना विभाग का पुनः नामांकन सहमति पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रदेशभर में बहस छिड़ गई है। सहमति पत्र में दर्ज एक पंक्ति ने नगर सैनिकों के बीच असंतोष और जनता के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सहमति पत्र में उल्लेख है कि सैनिक अपने वरिष्ठ अधिकारियों की आज्ञा का पालन “अपने जीवन को संकट में डालकर भी” करेंगे। अब सवाल उठ रहे हैं— ** क्या नौकरी करने की शर्त अपनी जान जोखिम में डालना हो सकती है? ** क्या अधिकारियों के आदेशों के लिए सैनिकों का जीवन दांव पर लगाना उचित है? ** जब नगर सैनिक वर्षों से वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, तब उनसे ऐसी शर्तों पर हस्ताक्षर क्यों कराए जा रहे हैं? नगर सेना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया लगभग 50 वर्षों से चली आ रही है और इसका उद्देश्य बाढ़, आपदा एवं अन्य विषम परिस्थितियों में कर्तव्य पालन से जुड़ा है। उनका दावा है कि इसमें किसी प्रकार की नई शर्त नहीं जोड़ी गई है। लेकिन वायरल दस्तावेज़ के बाद नगर सैनिकों और आम जनता के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि कर्तव्य पालन और जीवन को अनावश्यक जोखिम में डालने की शर्त—इन दोनों के बीच स्पष्ट सीमा तय होना जरूरी है। नगर सैनिक 24 घंटे जनता की सेवा में तैनात रहते हैं। ऐसे में उनके अधिकार, सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन और सेवा सुविधाओं पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। डी. एन. योगी कबीर क्रांति समाचार

क्या अधिकारियों के लिए अपनी जान जोखिम में डालेंगे नगर सैनिक?**
मुख्यालय का पुनः नामांकन सहमति पत्र वायरल, एक शर्त ने खड़े किए बड़े सवाल**
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट**
नगर सेना विभाग का पुनः नामांकन सहमति पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रदेशभर में बहस छिड़ गई है। सहमति पत्र में दर्ज एक पंक्ति ने नगर सैनिकों के बीच असंतोष और जनता के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सहमति पत्र में उल्लेख है कि सैनिक अपने वरिष्ठ अधिकारियों की आज्ञा का पालन “अपने जीवन को संकट में डालकर भी” करेंगे।
अब सवाल उठ रहे हैं—
** क्या नौकरी करने की शर्त अपनी जान जोखिम में डालना हो सकती है?
** क्या अधिकारियों के आदेशों के लिए सैनिकों का जीवन दांव पर लगाना उचित है?
** जब नगर सैनिक वर्षों से वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, तब उनसे ऐसी शर्तों पर हस्ताक्षर क्यों कराए जा रहे हैं?
नगर सेना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया लगभग 50 वर्षों से चली आ रही है और इसका उद्देश्य बाढ़, आपदा एवं अन्य विषम परिस्थितियों में कर्तव्य पालन से जुड़ा है। उनका दावा है कि इसमें किसी प्रकार की नई शर्त नहीं जोड़ी गई है।
लेकिन वायरल दस्तावेज़ के बाद नगर सैनिकों और आम जनता के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि कर्तव्य पालन और जीवन को अनावश्यक जोखिम में डालने की शर्त—इन दोनों के बीच स्पष्ट सीमा तय होना जरूरी है।
नगर सैनिक 24 घंटे जनता की सेवा में तैनात रहते हैं। ऐसे में उनके अधिकार, सुरक्षा, सम्मानजनक वेतन और सेवा सुविधाओं पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
डी. एन. योगी
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