**जिला पंचायत अध्यक्ष कैसे बना करोड़ पती कबीर क्रांति करेगा खुलासा,,? ** “सहकारिता पर किसका राज? गोपनीय बैठकों से गरमाया कवर्धा का सियासी माहौल!” **“धान खरीदी में ‘एडजस्टमेंट’ का खेल! किसानों के नाम पर करोड़ों की चर्चा” ** “समिति किसान की या सिस्टम वालों की? जिला भर में उठ रहे बड़े सवाल” ** “फाइलों में कट रही असली फसल? सोसायटी प्रबंधकों की बैठकों पर मचा बवाल” कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट “धान खेत में किसान उगाता है, लेकिन असली फसल फाइलों में काटी जाती है!” कवर्धा से लेकर पूरे जिले की दुकानों, सोसायटी परिसरों और सरकारी दफ्तरों में इन दिनों एक ही सवाल गूंज रहा है — ** आखिर जिला पंचायत अध्यक्ष सहकारी समितियों के प्रबंधकों की गोपनीय बैठकें किस अधिकार से लेते हैं? चर्चाओं का बाजार गर्म है। बताया जा रहा है कि जिले की कई सहकारी समितियों के प्रबंधकों को समय-समय पर बंद कमरे में बैठक के लिए बुलाया जाता है। अब लोग सहकारिता अधिनियम और नियम-कानून की किताब पलटकर पूछ रहे हैं कि समितियों का असली प्रशासनिक नियंत्रण आखिर किसके पास है? जानकारों के अनुसार सहकारी समितियां सीधे सहकारिता विभाग के अधीन संचालित होती हैं। इनकी निगरानी डिप्टी रजिस्ट्रार, संयुक्त पंजीयक और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। धान खरीदी और खाद वितरण में जिला विपणन अधिकारी (DMO), खाद विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम की भी अहम भूमिका रहती है। नियम कहते हैं कि किसी भी समिति प्रबंधक को निर्देश विभागीय अधिकारियों से मिलने चाहिए। ऐसे में अब गांव-गांव में सवाल उठ रहा है — ** “अगर पूरा सिस्टम विभाग के अधीन है तो हर मामला लेकर प्रबंधक अध्यक्ष महोदय के पास क्यों जाते हैं?” चर्चा यह भी है कि अध्यक्ष महोदय पहले स्वयं सोसायटी व्यवस्था में काम कर चुके हैं, इसलिए पूरे सिस्टम पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। गांवों में लोग तंज कसते सुनाई दे रहे हैं — ** “सहकारिता विभाग कागज में चलता है, असली कंट्रोल कहीं और से होता है।” ** “एडजस्टमेंट” या करोड़ों का खेल? सूत्रों के हवाले से यह फुसफुसाहट भी तेज है कि कई प्रबंधकों से मोटी रकम मांगे जाने की चर्चाएं अंदरखाने में हुईं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चाएं अब चौपाल से बाजार तक पहुंच चुकी हैं। सबसे ज्यादा सवाल धान खरीदी को लेकर उठ रहे हैं। नियमों के मुताबिक किसानों को सही तौल, सही पर्ची और पारदर्शी भुगतान मिलना चाहिए। लेकिन गांवों में चर्चा है कि कई जगह पर्ची में मात्रा कुछ और और वास्तविक धान कुछ और होता है। किसानों को कथित तौर पर कहा जाता है — ** “अभी पर्ची कटवा लो, पैसा बाद में एडजस्ट हो जाएगा।” और यही “एडजस्टमेंट” बाद में लाखों-करोड़ों के खेल में बदल जाता है — ऐसी चर्चाएं अब खुलेआम हो रही हैं। ** राइस मिलर और प्रबंधकों की सांठगांठ? लोगों का आरोप है कि कई समितियों में प्रबंधकों और राइस मिलरों की कथित मिलीभगत से कागजों में धान ज्यादा और गोदाम में कम दिखाया जाता है। अगर ऐसा है तो यह केवल विभागीय लापरवाही नहीं बल्कि सहकारिता अधिनियम, वित्तीय नियमों और सरकारी खरीदी प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है। ** सहकारिता कानून क्या कहता है? ** समिति का संचालन पारदर्शी होना चाहिए ** सदस्यों को जानकारी पाने का अधिकार है ** नियमित ऑडिट अनिवार्य है ** वित्तीय गड़बड़ी पर जांच और कार्रवाई का प्रावधान है ** समिति किसानों के हित के लिए बनाई गई है, किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव के लिए नहीं लेकिन गांवों में लोग अब खुलकर कह रहे हैं — “समिति किसान की कम, सिस्टम वालों की ज्यादा हो गई है।” जनता के बड़े सवाल ? क्या जिला पंचायत अध्यक्ष को समितियों के प्रबंधकों की गोपनीय बैठक लेने का वैधानिक अधिकार है? ? यदि बैठकें आधिकारिक हैं तो उनका रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं होता? ? धान खरीदी में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कब होगी? ? करोड़ों के धान के खेल में आखिर जिम्मेदार कौन है? फिलहाल पूरे जिले में एक ही लाइन सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है — “धान खेत में किसान उगाता है… लेकिन असली फसल फाइलों में काटी जाती है!” कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ डी एन योगी की रिपोर्ट Spread the love Post navigation कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट कवर्धा वन विभाग में “20 प्रतिशत कमीशन” की चर्चा तेज ! कवर्धा वन विभाग इन दिनों गंभीर चर्चाओं और आरोपों के घेरे में है। विभाग के अंदरखाने से ऐसी चर्चाएं निकलकर सामने आ रही हैं कि हर छोटे-बड़े काम में “20 प्रतिशत कमीशन” की मांग की जा रही है। आरोप यह भी है कि बड़े अधिकारी मलाई काटने में मस्त हैं, जबकि छोटे अधिकारी और कर्मचारी भारी दबाव में काम करने को मजबूर हैं। सूत्रों के अनुसार विभाग में फाइल आगे बढ़ाने से लेकर निर्माण कार्य, भुगतान और अन्य प्रक्रियाओं तक में कथित कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। इससे ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारी-कर्मचारी भी परेशान बताए जा रहे हैं। वन विभाग के गलियारों में अब यह सवाल गूंजने लगा है कि आखिर कब तक “कमीशन राज” चलता रहेगा? क्या शासन-प्रशासन इस पूरे मामले की जांच करेगा या फिर सब कुछ ऐसे ही चलता रहेगा? जनता का कहना है कि अगर विभागों में इसी तरह कमीशनखोरी हावी रही तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी व्यवस्था दोनों पर बड़ा असर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन चर्चाओं और आरोपों पर क्या सफाई देते हैं और क्या कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं… कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट *विधायक भावना बोहरा ने न.पं. इन्दौरी में मिनी स्टेडियम सहित 2 करोड़ 84 लाख से अधिक के विकास व अधोसंरचना निर्माण कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन, सुशासन तिहार में किया जनसमस्याओं का निराकरण* *विधायक भावना बोहरा के प्रयासों से न.पं. इन्दौरी की बदल रही तस्वीर, 2 करोड़ 85 लाख से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन, सुशासन तिहार में किया जनसमस्याओं का निराकरण* कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट