कबीर क्रांति – स्मृतियों में बसा एक दौर | श्रीपाल शर्मा की कलम से राजनांदगांव नगर के हृदय स्थल, कृष्णा टॉकीज के सामने कभी एक ऐसा ठिकाना हुआ करता था, जो सिर्फ एक होटल नहीं, बल्कि विचारों का संगम था — बाबूलाल होटल। यह वही जगह थी जहाँ सुबह से शाम तक चाय और समोसों के साथ साहित्य, पत्रकारिता और समाज की गूंज सुनाई देती थी। खासकर मीठे समोसे के लिए मशहूर इस होटल में कवियों, लेखकों और पत्रकारों का रोज़ जमावड़ा लगता था। नगर के प्रख्यात कवि स्व. नन्दु लाल चोटिया जी यहाँ अक्सर अपनी उपस्थिति से माहौल को साहित्यिक बना देते थे। उनके साथ ही कई जानी-मानी हस्तियाँ इस होटल की रौनक बढ़ाती थीं, जिनमें — स्व. सरोज द्विवेदी (कवि, पत्रकार, लेखक), स्व. चंद्र कुमार जैन, योगेश मिश्रा (भाजपा नेता), और कैलाश श्रीवास्तव (कम्युनिस्ट नेता) जैसे नाम शामिल हैं। लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल गया। आज उस ऐतिहासिक बाबूलाल होटल की जगह एक आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खड़ा है। जहाँ कभी विचारों की महफ़िल सजती थी, वहाँ अब व्यापार की हलचल है। यह सिर्फ एक जगह का बदलना नहीं, बल्कि एक पूरे दौर का इतिहास बन जाना है — एक ऐसा दौर, जहाँ चाय की चुस्कियों के साथ शब्दों की ताकत जन्म लेती थी। — श्रीपाल शर्मा, पत्रकार कबीर क्रांति

D.N. Yogi

ByD.N. Yogi

Apr 22, 2026

कबीर क्रांति – स्मृतियों में बसा एक दौर | श्रीपाल शर्मा की कलम से

राजनांदगांव नगर के हृदय स्थल, कृष्णा टॉकीज के सामने कभी एक ऐसा ठिकाना हुआ करता था, जो सिर्फ एक होटल नहीं, बल्कि विचारों का संगम था — बाबूलाल होटल।

यह वही जगह थी जहाँ सुबह से शाम तक चाय और समोसों के साथ साहित्य, पत्रकारिता और समाज की गूंज सुनाई देती थी। खासकर मीठे समोसे के लिए मशहूर इस होटल में कवियों, लेखकों और पत्रकारों का रोज़ जमावड़ा लगता था।

नगर के प्रख्यात कवि स्व. नन्दु लाल चोटिया जी यहाँ अक्सर अपनी उपस्थिति से माहौल को साहित्यिक बना देते थे। उनके साथ ही कई जानी-मानी हस्तियाँ इस होटल की रौनक बढ़ाती थीं, जिनमें —

स्व. सरोज द्विवेदी (कवि, पत्रकार, लेखक),

स्व. चंद्र कुमार जैन,

योगेश मिश्रा (भाजपा नेता),

और कैलाश श्रीवास्तव (कम्युनिस्ट नेता) जैसे नाम शामिल हैं।

लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल गया। आज उस ऐतिहासिक बाबूलाल होटल की जगह एक आधुनिक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खड़ा है।

जहाँ कभी विचारों की महफ़िल सजती थी, वहाँ अब व्यापार की हलचल है।

यह सिर्फ एक जगह का बदलना नहीं, बल्कि एक पूरे दौर का इतिहास बन जाना है —

एक ऐसा दौर, जहाँ चाय की चुस्कियों के साथ शब्दों की ताकत जन्म लेती थी।

— श्रीपाल शर्मा, पत्रकार

कबीर क्रांति

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