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देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट*

एक लाख में आंगनबाड़ी की नौकरी! कबीरधाम में सौदेबाजी का ऑडियो वायरल, नियुक्ति निरस्त – अब जांच की बारी”

कवर्धा,
कबीरधाम जिले के तरेगांव जंगल में संचालित एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय में पदस्थ परियोजना अधिकारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्राम पंचायत मुड़घुसरी मैदान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका के पदों की भर्ती में पैसे के बदले नियुक्ति करने का मामला सामने आया है। इस कथित सौदेबाजी का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसने प्रदेश सरकार के सुशासन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।

पीड़िता गीता मेरावी ने आरोप लगाया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए एक लाख रुपये की मांग की गई थी। गीता के अनुसार, परियोजना अधिकारी नमन देशमुख द्वारा उससे मोबाइल पर संपर्क कर पहले कार्यालय बुलाया गया, फिर पंचायत की सहमति सहित एक लाख रुपये की डील तय की गई। नियुक्ति पत्र तो जारी कर दिया गया, लेकिन जब गीता केवल 50 हजार रुपये ही जुटा सकी, तो उसकी नियुक्ति रद्द कर दी गई और प्रतीक्षा सूची की अभ्यर्थी को नियुक्त कर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई।

वहीं, सहायिका पद की अभ्यर्थी विद्या मेरावी से भी ₹25,000 की मांग की गई, जिसे पूरा न कर पाने पर उसका नाम दरकिनार कर अब नए सिरे से विज्ञापन जारी करने की बात सामने आई है।

कलेक्टर कबीरधाम ने लिया संज्ञान – जांच के आदेश जारी

पूरा मामला जब सार्वजनिक हुआ और ऑडियो वायरल हुआ, तो कलेक्टर कबीरधाम जिला कार्यालय आदेश संख्या 1312/मावि/शिका/2025 दिनांक 28.07.2025, कलेक्टर – जिला कबीरधाम) आदेश जारी कर पूर्व में जारी नियुक्ति आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बोड़ला को जांच अधिकारी नियुक्त कर एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

पदों की बिक्री – सुशासन पर बड़ा सवाल

इस मामले ने प्रदेश में शासन की पारदर्शिता और लोक सेवा में नैतिकता पर बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है। यह क्षेत्र प्रदेश के गृह मंत्री का निर्वाचन क्षेत्र होने से मामला और भी संवेदनशील बन गया है। यदि यह आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि नौकरियों की खरीद-फरोख्त खुलेआम चल रही है।

केवल यह मामला नहीं, पूरे कार्यकाल की हो जांच

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि उक्त अधिकारी के कार्यकाल में अब तक हुई सभी नियुक्तियों की जांच आवश्यक है, क्योंकि प्राथमिक दृष्टि में लगता है कि यह पहला मामला नहीं है। यदि विस्तृत जांच की जाए तो कई अन्य अनियमितताएं उजागर होने की पूरी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

निष्पक्ष और सूक्ष्म जांच की मांग
पीड़ितों और ग्रामीणों ने प्रदेश शासन, प्रशासन, विधायक और गृह मंत्री से इस पूरे मामले की निष्पक्ष व सूक्ष्म जांच की मांग की है ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।

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