
किसान विरोधी मोदी सरकार और रमन सरकार के कामों पर मजदूर किसानों को हिसाब चाहिये :
शैलेश नितिन त्रिवेदी
रायपुर : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के छत्तीसगढ़ प्रवास पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए और 2014 के लोकसभा चुनावों के वायदों को चुनावी जुमलेबाजी बताते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा, अमित शाह 2019 के लोकसभा चुनावों में कौन से जुमलों को उछाल कर वोट मांगेगे?
2014 में कालाधन लाने का वायदा करने वाले मोदी और शाह, हर के खाते में 15 लाख आने का वायदा करने वाले मोदी और शाह, हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार का वायदा कर वोट हासिल करने वालों से अब छत्तीसगढ़ और देश की जनता हिसाब मांग रही है।
प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने पूछा है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के लोकसभा के 10 और राज्यसभा के 3 कुल 13 सांसद हैं, उसके बाद भी राज्य से एक भी कैबिनेट मंत्री क्यों नहीं बनाया गया? अमित शाह छत्तीसगढ़ के साथ हुए इस अन्याय का कारण समझायें। अमित शाह बतायें महिला आरक्षण महंगाई बेरोजगारी आंतरिक सुरक्षा देश की रक्षा जरूरतें स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट मजबूत लोकपाल नहीं दिया तो अब किस आधार पर भाजपा मतदाताओं से वोट मांगेगी? छत्तीसगढ़ की जनता भाजपा और मोदी से पिछले चुनावों का बदला विधानसभा चुनावों के समान ही लेने वाली है। छत्तीसगढ़ में भाजपा का खाता भी नहीं खुलने वाला।
प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकारें किसानों की दुर्दशा के लिये उत्तरदायी है। भाजपा की केंद्र में सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ के किसानों को एक-एक दाना धान की खरीद से वंचित किया गया था फिर कौन से मुंह से शाह छत्तीसगढ़ के किसानों से वोट मांगेगे?
2014 के लोकसभा चुनावों के घोषणा पत्र में भाजपा ने कृषि लागत और मूल्य पर 50 प्रतिशत किसानों को लाभ देने का वादा किया था। 2018 में कृषि लागत 1726 रू. प्रतिक्विंटल से भी अधिक थी। अमित शाह बतायें कि धान का समर्थन मूल्य सिर्फ 1750 रू. प्रतिक्विंटल क्यों घोषित किया गया?
मोदी कहते हैं कि 2024 तक वही प्रधानमंत्री होंगे। होंगे तो उनके कार्यकाल के दूसरे हिस्से में भी खेती की असफलता मुंह बाये खड़ी रहेगी। किसान हाहाकार कर रहे होंगे। उन्हें भटकाने के लिए युद्ध का उन्माद रचा जा रहा होगा या सांप्रदायिकता का ऊबाल पैदा किया जा रहा होगा। तब किसान दस साल के व्हाट्स एप मेसेज पलट कर देख रहे होंगे कि उन्होंने अपने जीवन का एक दशक किन बातों में निकाल दिया। रैली और धरना करेंगे तो मीडिया उन्हें देशद्रोही घोषित कर देगा और पुलिस लाठियों से उनका हौसला तोड़ चुकी होगी। बात मोदी या किसी और सरकार की नहीं है, खेती की यह हालत देश में जो अस्थिरता पैदा करेगा, उसकी है। किसानों को इस मोदी धोखे की बखूबी जानकारी है। कृषि मामले में अर्थशास्त्रियों के अध्ययन से भाजपा का किसान विरोधी चरित्र उजागर हो गया।




