साहब… टेबल के नीचे से पहुंच जाता है जरूरी सामान, इसलिए बालोद पुलिस है मेहरबान, बालोद थाना क्षेत्र में अवैध लेनदेन का कारोबार जारी

साहब… टेबल के नीचे से पहुंच जाता है जरूरी सामान, इसलिए बालोद पुलिस है मेहरबान,
बालोद थाना क्षेत्र में अवैध लेनदेन का कारोबार जारी
अनीश राजपूत
बालोद-इन दिनों बेहद चर्चा में है बालोद थाने की पुलिस और उनकी कार्यशैली। चौक चौराहा में यह एक आम बात हो गई है यह बालोद थाने की पुलिस के बारे में जब भी चर्चा हो दिशा उल्टी हो जाती है। यानी सकारात्मक बात दो लोगों की जुबां पर ही बालोद थाना पुलिस के लिए नहीं आती। चर्चा है कि बीते दिनों खबर प्रकाशन के बाद बालोद पुलिस की ओर से छोटे-मोटे सट्टा लिखने वालों पर कार्यवाही करते हुए महज एक औपचारिकता पूरी की ताकि लोगों को ऐसा न लगे की बालोद थाने की पुलिस नींद में है। और कार्यवाही भी ऐसी की बड़े खाईवाल मजे में और छोटे खाईवाल सजे में। उक्त कार्यवाही को देखकर अब लोगों के दिमाग में सवाल उठना लाजमी भी है और चर्चा भी होने लगी है कि पुलिस के टेबल के नीचे से उनके जरूरतों का सामान उन्हें मिल जाता है तो भला ऐसे में कार्यवाही क्यों करेगी? जायज भी है की अगर किसी को उनके जरूरत की पूर्ति हो जाती है तो भला उस और झांकने की क्या जरूरत है। लेकिन शासन के पैसे यह कार्य के लिए बालोद थाना पुलिस झोंक रही है वह उनके जिंदगी का गुजारा करने के लिए काफी नहीं है जिसके कारण आवश्यक जरूरी सामानों की पूर्ति के लिए अवैध कारोबारियों को आसरा बना रखी है। ऐसा हमारी ओर से नहीं बल्कि बालोद नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अगर जनता की रक्षा करने वाला रक्षक ही ऐसा करने लगे तो जनता किस पर भरोसा करें? ऐसे में तो अपराध घटेगा नहीं बल्कि और चरम पर पहुंचता जाएगा?
मुख्यालय में खुले आम चल रहे सट्टे के कारोबार में बालोद पुलिस अब तक सुध नही ले रहा है आपको बता दे कि यह सीधे सीधे गृह मंत्री के बयान को नजर अंदाज करने वाली बात है या कुछ और है ये जान्ने वाली बात है थाने के एक कांस्टेबल द्वारा जिले के हर काला काम करने वाले का नम्बर मौजूद होता है थाने के घटना होने के कुछ समय पर ही लेन देन की बात थाने के वरिष्ठ अधिकारी उसपर छोड़ देते है जिससे आज कल वह कॉन्स्टेबल अपने आप को थाना प्रभारी से कम नही समझता और अभी थाने में आये वरिष्ठ सब इंस्पेक्टर भी उसके बिना पूछे केश दायर नही करते है थाना प्रभारी जी एस ठाकुर से चर्चा हुई तो उनका कहना है कि आप हमेशा थाना के विपक्ष में खबर चलाते हो आपका बात मैं क्यों सुनु आपको थाने के सभी चीजों का सपोर्ट करना चाहिये यह कह कर फ़ोन काट दिये किसी अधिकारी का इस तरीके का बरताव जाहिर करता है कि सटोरिये इनके कितने प्रिय है।



