पंडरिया नगर में कोरोना वाइरस के प्रकोप को देखते हुए नगर के पूरे 15 वार्डो में समस्त 100% लोगो जांच कराया जाना चाहिये।

पंडरिया नगर में कोरोना वाइरस के प्रकोप को देखते हुए नगर के पूरे 15 वार्डो में समस्त 100% लोगो जांच कराया जाना चाहिये।
कुछ बाते है जो मैं आप सब के
सामने रखना चाहूँगा –
कवर्धा, जिला प्रशासन ने 26 जुलाई से 2 अगस्त तक लॉकडाउन का आदेश जारी किया है, 3 दिन का समय आमजन को आवश्यक वस्तुवों की खरीदी के लिये दिया गया, इस कठिन समय मे सावधानी के लिए ये आवश्यक भी है, ये मैं मानता हुँ, व्यापारी भाइयो ने स्वतः सामने आकर दुकाने सावधानी रखते हुए बन्दकर दी है, अघोषित रूप से प्रशासन भी दुकाने बंद करवाता दिखा,
मतलब 3 दिन का अघोषित लॉकडाउन व 7 दिन का घोषित लॉकडाउन कुल 10 दिन, 3 दिन का अघोषित लॉकडाउन जो किया गया है, ये वो समय था जिसमें आमजन आवश्यक वस्तुवों, रोजमर्या की खरीददारी सामान्य तौर पर उचित मूल्य पर करती,
अब निश्चित तौर पर आवश्यक वस्तुवों की कमी होगी, कालाबाजारी बढ़ेगी, जिसका खामियाजा आमजन को ही भुगतना होगा, क्या ये 3 दिन का अघोषित लॉकडाउन करवाने वालो की नैतिक जिम्मेदारी नही बनती, की वे कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों पर भी कार्यवाही करें, जो कि अभी तक देखने को नही मिला है।
परसो जो 33 कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आये उसमें इस मरीज ऐसा भी सामने आया जिसका टेस्ट ही नही किया गया था, लेकिन रिजल्ट पोसिटिव आया, निश्चित तौर पर ये प्रशासन की बड़ी लापरवाही थी, जिस पर जिम्मेदार कर्मचारी पर कार्यवाही भी की गई,
लेकिन प्रशासनिक चूक की बाते तो शोसल मीडिया पर छाई रही, लेकिन जो 33 मरीज को होम कोरोटाइन होना, जिसमे ज्यादातर लोग जनप्रतिनिधि, व्यापारी व नगर के महत्वपूर्ण लोग है, जिनके सम्पर्क में सैकडों लोग आए है, पूरे शहर में घूमते दिखे, उन्होंने अपनी लापरवाही से आज पूरे पंडरिया शहर की स्वास्थ्य सुरक्षा को खतरे में नही डाल दिया है, आज जो कोरोना को लेकर शहर में भय का माहौल है, उसके जिम्मेदार क्या ये होमकोरेंटीन का पालन करने वाले लोग नही है।
अधूरा सच झूठ से ज्यादा खतरनाक होता है, प्रशासनिक लापरवाही को इतना ज्यादा प्रचारित किया गया, शायद इसका कारण होमकोरेंटीन का पालन नही करने वालो की ग़लतियो को छुपाना भी हो सकता है, क्यूंकि सभी चर्चा प्रशासन की लापरवाही पर ही करते दिखे, इस ज्यादा लापरवाह लोगो पर कोई चर्चा नजर नही आई।
मेरे इस पोस्ट का आशय कतई किसी को हतोत्साहित करना नही है, जो 33 मरीज है वे सब हमारे अपने है मैं उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ, लेकिन इसका आशय ये कतई नही होना चाहिये कि होमकोरेंटीन का पालन न करने वाले, गम्भीर लापरवाह लोगो की गलतियों को हम दबाये, पंडरिया शहर को इस मुसीबत में डालने के लिये क्या ये लोग जिम्मेदार नही है,
जिम्मेदार मीडिया से जुड़े ज्यादातर लोग भी आधा सच ही सामने लाते है ऐसा मेरा मानना है।
आशिष जैन
अध्यक्ष – रेल्वे संघर्ष समिति




