_राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के संचालक यज्ञदत्त शर्मा ने की राज्यपाल से मुलाकात_

_राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के संचालक यज्ञदत्त शर्मा ने की राज्यपाल से मुलाकात_
_तेंदूपत्ता संग्राहकों की बीमा और अन्य सुविधाओं के समाप्त होने की दी जानकारी_
_छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाली बीमा और अन्य सुविधा दिलाने का किया आग्रह_
_राज्यपाल ने दिया आश्वासन, बीमा योजना भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण, आवश्यक कार्यवाही के लिए करूंगी निर्देशित_
अनीश राजपूत
_बालोद: प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चलाई जा रही बीमा योजना बंद होने, प्रोत्साहन बोनस वितरण नहीं होने और प्राथमिक समितियों को लाभांश नहीं दिये को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित के संचालक यज्ञदत्त शर्मा ने राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके से राजभवन में सौजन्य मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने राज्यपाल को छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाली बीमा और अन्य सुविधाओं के समाप्त होने की विस्तारपूर्वक जानकारी दी और बताया कि, पूरे देश में सबसे ज्यादा तेंदूपत्ता उत्पादन यहीं होता है बावजूद इसके तेंदूपत्ता संग्राहक एक अनूठी और व्यापक बीमा योजना से वंचित है। संग्राहकों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के सदस्य होते है इसमे बहुसंख्यक परिवार पांचवी अनुसूचित शामिल क्षेत्र में निवासरत है। मुलाकात के संबंध में जानकारी देते हुवे यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि, प्रदेश में लगभग 13 लाख 50 हजार तेंदूपत्ता संग्राहक तथा 10 हजार फड़ मुंशी है। उन्हें कोई बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। 900 प्रबंधकों का बीमा नवीनीकरण नहीं कराये जाने के कारण 17 मार्च 2019 से बंद है। नई योजना कब लागू की जाएगी, यह स्पष्ट नहीं है। इसी तरह संग्राहक परिवारों के 18 लाख 38 हजार सदस्यों के लिए समूह बीमा योजना नवीनीकरण नहीं कराये जाने के कारण बंद है। प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियां के फड़ मुंशियों का भी समूह बीमा नवीनीकरण नहीं होने के कारण बंद है। साथ ही विगत 2 सत्रों की छात्रवृत्ति योजना की राशि भी अभी तक जारी नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि प्रोत्साहन पारिश्रमिक बोनस वर्ष 2018 का लगभग 221 करोड़ रूपए बताया जा रहा है, जबकि 31 मार्च 2019 की स्थिति में 597 करोड़ का भुगतान किया जाना शेष बताया गया था। सीजन 2019 की गणना नहीं की गई है। प्राथमिक समितियों को लाभांश 31 मार्च 2019 की स्थिति में उक्त राशि 432 करोड़ रूपए है। सभी मदों में लगभग 100 करोड़ राशि ब्याज से प्राप्त होती है, जिससे संग्राहकों के लिए बीमा योजना संचालन किया जा सकता है। राज्य के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को इस बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाली बीमा और अन्य सुविधा दिलाने का आग्रह किया है।_




