कवर्धादुर्ग

 अगर हम ईस्वर को मानते हैं तो हमे विस्वास के साथ ईस्वर के बताए मार्ग पर चलना होगा,,जानकी देवी ठाकुर

                             जानकी देवी ठाकुर, कवर्धा

डी एन योगी कवर्धा, कबीर क्रांति ,,,कवर्धा,,,,कहते हैं जीवन अमूल्य है और इन्शान इस अमूल्य जीवन को बचाने के लिये पता नही क्या क्या जतन करता है और न जाने इस छोटे से जीवन में कैसे कैसे सपने सँजो लेता है जीवन सँवारने के इस फेर में उस सच्चाई को अनदेखा करता है जो उसके, नशीब में जन्म लेते ही ईस्वर लिख देता है जिसे सब जानते हैं ,,मृत्यु,फिर भी हम बेखौफ मोह माया से भरे जीवन केरण में उतर जाते हैं और चल पड़ते हैं आसमान की बुलंदियों को छूने जहां हम अपने शोहरत का परचम फहरा सके हम भूल जाते हैं कि हम सतयुग के मनु सतरूपा नही हैं जहां लोग 250 वर्ष तक एक पैर में
 ख़ड़े हो कर ईस्वर कि आराधना करते थे और मनचाही मनोकामना पूर्ण कर लेते थे पहले लोग जो तपस्या्। करते थे वो लोक कल्याण के लिये होता था बीते युगों। में लोगों को अपने मौत का भी अहसास होता था बीते तीनो काल के लोग ज्यादातर लोकहित ,,,देशहित, की बातें सोचा करते थे इसलिये शायद ईष्वर भी उनके करीब होते थे उनके लिये ईस्वर का दर्शन आसान होता था
: लेकिन आज ऐसा  नही है क्यों कि कलयुग का प्रभाव सर चढ़कर बोल रहा है आज हमारी जीवन रेखा छोटी हो गई हमारा सोच सात्विक नही रहा हमारा भोजन हमारा कृत्य भी राकच्छसि है जिंदगी और मौत के बीच एक पल का फासला है इसका अहसास हमे तब होता है जब हम किसी को अंतिम बिदाई देने शमशान तक जाते है और जलती चिता को देख कर कुछ देर के लिए हमे हमारा भविस्य साफ नजर आता है
: लेकिन क्या श्मशान से लौटने के बाद हम अपने सोच को कायम रख पाते हैं नही रख पाते फिर रोज की तरह हम अपने सपनो की दुनिया में खो जाते है कहते हैं शास्त्र के मुताबिक श्मशान में शिव जी का वास होता है चिता का भस्म भोले नाथ को प्यारा है हम अगर चाहे तो जीवन और मृत्यु के बीच जो एक पल होता है उसे शिव का नाम लेकर हम सार्थक बना सकते हैं
 अगर हम इस्वर को मानते हैं तो हमे विस्वास के साथ ईस्वर के बताए मार्ग पर चलना होगा ,,,प्रेम बाट कर हम राम राज्य की स्थापना कर सकते हैं ,,ईस्वर का सानिध्य भी पा सकते हैं ,जीवन में संघर्ष नाम की कोई चीज नही होगी जीवन सरल हो जाएगा फिर हमें गर्व होगा कि हम अपने कर्मो से रामायण और भगवत गीता के सार्थकता को कायम रखा है इसी आधार पर हम मानवता को कलयुग में भी कायम रख सकते हैं,,विचार जानकी देवी

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