कवर्धादुर्ग

अगर समय आप के विपरीत हो जाय तो आप को गर्त में जाने से कोई रोक नही सकता,,,जानकी देवी कवर्धा

                                              जानकी देवी ,कवर्धा

डी,एन, योगी, एडीटर इन चीफ कबीर क्रांति,कवर्धा

कवर्धा,,विचार,समय चक्र, समय ही है जो बलवान होता है समय के आगे हम मनुष्यों की क्या बिसात शास्त्र के अनुसार अगर समय आप के अनुकूल है तो आप की शोहरत बुलन्दियों पर होगी अगर समय आप के विपरीत हो जाय तो आप को गर्त में जाने से कोई रोक नही सकता और समय आप के कर्मो के हिसाब से अनुकूल और विपरीत होता है ये सच है,,जो जस करहिं सो तस फल चाखा,, ये मिथ्या नही है क्या हमने कभी सोचा है कि हम मनुषयो को ईस्वर ने धरती पर क्यों भेजा है हम सोच सकते हैं लेकिन हमने इस ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया आज हर मनुष्य आर्थिक संपन्नता शोहरत,भोग विलास,को ही अपना मंजिल मान चुका है मनुष्य का दुर्भगय देखो सब कुछ पाने के बाद भी अपने आकांछाओं पर लगाम नही लगा सकता क्योंकि जैसे ही इन्शान को अपने आशाओं के अनुकूल सफलता मिल जाती है उसके आकांछाओं की उड़ान आकश छूने लगती है अपने सारी सफलताओं का श्रेय किसी धार्मिक स्थल पर दुनिया को दिखाने के लिये ईस्वर को देता है आज के दुनिया के सफल ब्यक्तियों की वास्तविकता उनका सच तब दिखता है जब वो अपने ब्यापार के सम्बंध में विदेशों में कंही सेमिनार में अपनी सफलता की कहानी सुना रहे होते हैं बड़े गर्व उनका बयान आता है कि कैसे गरीबी से उठ कर इस मुकाम पर पहुचा है इस कहानी मैं कंही ईस्वर का जिक्र नही होता क्यों कि उसका अहंकार उसे ईश्वर की ओर झुकने नही देता इन्शान जब सफलता की सीढ़ी लगातार चढ़ने लगता है तो साथ ही उसका अहंकार चलने लगता है और अपने साथ चलने वाले अनुकूल समय को भूल जाता है तब वो समझ ही नही पाता कि समय ही ईस्वर का स्वरूप है जो उसके अंदर अहंकार आने से पहले तक उसके साथ चला और उसने जो आज के जीवन में सफलता का मुकाम हासिल किया है वो उसके ईमानदारी और मेहनत का परिणाम है जिसमे अहंकार के लिये कोई इस्थान नही था तब तक समय का साथ था अहंकार के आते ही वह सफल ब्यक्ति धीरे धीरे पतन की ओर अग्रसर होने लगता है ,,उसे पता ही नही चलता समय उसका साथ कब छोड़ गया क्यों कि अपने सफलता का श्रेय वो अपने आप को देने लगता है और अहंकार से भरा होता है में नाम नही लूंगा ,,आज भी बहुत लोग आपके नज़रों के सामने हैं जिनको आप राजा से रंक बनते देख सकते हैं ,चाहे वो धर्म गुरु हों या उद्योगपति या फिर जने माने राजनेता असल में आज का इन्शान समझ ही नही पाया ,,ईस्वर ने उसे दुनिया मैं भेजा क्यों है सच तो ये है कि ऊपर वाले ने हमे धर्म और इन्शानियत की रक्छा के लिये भेजा है प्रेम और एक दूसरे का दर्द बाटने के लिये भेजा है हमारे जीवन में अहंकार का कोई स्थान नही है क्योंकि अहंकार मनुष्य के पतन का कारण है इस पर भी समझ में न आए तो ,,शिव जी, के चहेते भक्त रावण की जीवनी को जाने इसके लिये आप को रामायण अवश्य पढ़ना चाहिये,,जनकी देवी,,कवर्धा

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