कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट* कवर्धा— आदित्यवाहिनी कवर्धा के द्वारा धर्म सम्राट स्वामी श्रीकरपात्री जयंती धूमधाम से मनाई गई

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट*
कवर्धा— आदित्यवाहिनी कवर्धा के द्वारा धर्म सम्राट स्वामी श्रीकरपात्री जयंती धूमधाम से मनाई गई
कवर्धा**सर्वप्रथम आदित्यवाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष अवधेश नंदन श्रीवास्तव, पूर्व जिला अध्यक्ष मारुतिशरण शर्मा , अमित शर्मा एवं शुभांक शर्मा, शाश्वत शर्मा ने श्री राधाकृष्ण बड़े मंदिर में धर्मसम्राट की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की। आदित्यवाहिनी के जिला उपाध्यक्ष नंदू ठाकुर, सचिव बृजभूषण वर्मा, सह सचिव अंकुश विश्वकर्मा, भोला तिवारी, राजाराम चंद्रवंशी, सुरेंद्र गुप्ता, अखिलेश देवांगन, दुर्गेश ठाकुर, कमलेश ठाकुर आदि ने सामूहिक पूजन एवं सत्संग में भाग लिया तदोपरांत प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में संस्था के पदाधिकारी ने धर्म सम्राट के जीवन वृत्त पर प्रकाश डालते हुए बताया कि धर्मसम्राट श्री स्वामी करपात्री जी महाराज शांकर परम्परा में दण्डी स्वामी थे। विद्वता के शिखर पर विराजमान एक ऐसे युगद्रष्टा जिनको “अभिनव शंकर” और “धर्मसम्राट” की उपाधि से विभूषित किया गया। श्री स्वामी करपात्री का सम्पूर्ण जीवन त्याग, तपस्या से परिपूर्ण और सनातन धर्म को सशक्त संगठित कर उसके गौरवपूर्ण स्थान पर शोभायमान करना था।
धर्म सम्राट श्री स्वामी करपात्री जी महाराज भारत के परतंत्रता के दिनों में सनातन धर्म के विपरित और विरुद्ध चलाये जा रहे कुचक्रों और षडयंत्रों से अच्छी तरह से परिचित थे। परिचित होकर वो बैठे नहीं अपितु समग्र भारत का भ्रमण कर सनातन धर्म के दार्शनिक, बुद्धिजीवियों और संत समाज को श्री स्वामी करपात्री जी महाराज ने अधिवेशनों, धर्मसभाओं, धर्मसेना के माध्यम से एकजुट किया और स्वंतंत्रता संग्राम में भी निर्णायक भूमिका निभाई। ब्रिटिश, मुस्लिम लीग, आर्य समाज, मिशनरीज़, दलित विचारक, राजनैतिक दल अपने – अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिये सनातन धर्म की मनमानी व्याख्याऐं और आरोप-प्रत्यारोप के द्वारा सनातन धर्म को हानि और क्षति पहुंचा रहे थे। श्री स्वामी जी ने उस समय मोर्चा संभाला और अपनी विद्वता से सनातन धर्म के विषय में जो भ्रांतियां और भ्रम फैलाये जा रहे थे उनको प्रबल प्रतिउत्तर दिया।
श्री स्वामी करपात्री जी महाराज ने अपने ग्रन्थों के माध्यम से कई प्रकार की विचारधाराओं और दर्शन से श्रेष्ठ सनातन धर्म को सिद्ध किया। उदाहरण के लिये “मार्क्सवाद और रामराज्य” तथा “रामायणमीमांसा” , “विचारपीयूष” जैसे अनेक ग्रन्थों की संरचना कर श्री स्वामी जी जहां वैदिक वांगमय में अंतर्निहित सर्वमंगलमयी विचारधारा और दिग्विजयी दर्शन को विश्वपटल पर रखा।
धर्मनियंत्रित पक्षपातविहिन शोषनविर्निमुक्त सर्वहितप्रद शासनतंत्र जिसे रामराज्य ही कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी वही श्री स्वामी करपात्री जी महाराज का स्वप्न था। और उसकी प्रतिष्ठा के लिये उन्होंनें स्वतंत्रता संग्राम भी लड़ा और क्षेत्रीय धरातल पर जो सनातन धर्म के विरुद्ध षडयंत्र रचे जा रहे थे उन सबका भी श्री स्वामी जी ने अपने ग्रंथों, शास्त्रार्थ और अपने अथक परिश्रम से प्रतिउत्तर दिया।
श्री स्वामी करपात्री जी महाराज जगदगुरु शङ्कराचार्य भगवान द्वारा स्थापित शांकर परंपरा में दण्डी स्वामी थे और शास्त्रार्थ करने में पूर्ण पारंगत , निपुण , प्रवीण थे। कई बार शास्त्रार्थ में श्री स्वामी जी ने कईयों को परास्त किया। ग्रन्थों पर भाष्य और विषद व्याख्या कर श्री स्वामी करपात्री जी महाराज ने सनातन धर्म के उपासना वांगमय को और अधिक समृद्ध बनाया।
गौ वध पर रोक लगवाने मे लिये श्री स्वामी करपात्री जी महाराज ने 7-11-1966 में दिल्ली में अखिल भारतीय गौ रक्षा महाभियान समिति द्वारा आयोजित विराट प्रदर्शन का नेतृत्व किया जिसमें दस लाख गौभक्तों सम्मिलित हुऐ थे । उस सभा पर लाठी चार्ज किया गया था तथा श्री स्वामी जी को जेल में बंद कर दिया गया था।
श्री स्वामी करपात्री जी महाराज चाहते तो स्वयं शंकराचार्य बन सकते थे क्योंकी उनमें वो सभी योग्यताऐं थीं लेकिन करपात्री जी महाराज दण्डी स्वामी ही रहे। ये उनके त्याग का एक और प्रमाण है। वास्तव में श्री स्वामी करपात्री जी महाराज को जिस “अभिनव शंकर” और “धर्मसम्राट” की उपाधि से विभूषित किया गया वो उनके त्याग, तपस्या, पुरुषार्थ और विद्वतापूर्ण जीवन के लिये सार्थक ही है। श्री स्वामी जी वास्तव में धर्मसम्राट थे, हैं और रहेंगें।
जारीकर्ता
अंकुश विश्वकर्मा
सहसचिव आदित्यवाहिनी जिला – कवर्धा



