कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट पंचायत में मजदूरों की भरी जा रही फर्जी हाजिरी: मशीनों से खुदाई, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट
पंचायत में मजदूरों की भरी जा रही फर्जी हाजिरी: मशीनों से खुदाई, नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार लोगों को साल में कम से कम 150 दिनों का सुनिश्चित रोजगार प्रदान करना है। हालांकि, कबीरधाम जिले की मक्के पंचायत में इस महत्वपूर्ण योजना का स्वरूप पूरी तरह से बिगड़ चुका है। यहां जमीनी स्तर पर न तो मजदूर काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं और न ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कार्य मशीनों से धड़ल्ले से कराया जा रहा है, जबकि कागजों पर मजदूरों के नाम दर्ज कर फर्जी हाजिरी भरी जा रही है।
नाली निर्माण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा:
ग्राम मक्के में नंद राम साहू के घर से आंगनवाड़ी वैजलपुर तक लगभग 380 मीटर लंबी एक पक्की नाली का निर्माण कार्य मनरेगा के तहत स्वीकृत किया गया था। लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में न तो मजदूरों को लगाया गया और न ही मनरेगा के नियमों का किसी भी प्रकार से पालन किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि पूरी खुदाई और निर्माण कार्य मशीनों से किया गया है।
मनरेगा नियमों का खुला उल्लंघन, जिम्मेदारों पर संदेह:
ग्रामीणों ने इस गंभीर फर्जीवाड़े में रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक और पंचायत सचिव की मिलीभगत का सीधा आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इन अधिकारियों की मिलीभगत से ही मजदूरों की फर्जी हाजिरी भरी जा रही है और कार्य पूरा होने का प्रमाण पत्र भी जल्द ही फर्जी तरीके से जारी कर दिया जाएगा। जबकि वास्तविकता यह है कि मौके पर या तो कार्य अधूरा है या फिर उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है। यह मनरेगा अधिनियम 2005 का स्पष्ट उल्लंघन है, जिसके तहत योजना में मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है।
मनरेगा कानून क्या कहता है:
मनरेगा अधिनियम 2005 स्पष्ट रूप से कहता है कि इस योजना के तहत कार्य केवल मानव श्रम द्वारा ही किया जाना चाहिए। मशीनों का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके अतिरिक्त, अधिनियम के तहत प्रत्येक कार्यस्थल पर एक नागरिक सूचना पटल लगाना अनिवार्य है। इस सूचना पटल पर कार्य की अनुमानित लागत, कार्य में लगे मजदूरों की संख्या, कार्य की अवधि और अन्य महत्वपूर्ण विवरण स्पष्ट रूप से अंकित होने चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ग्रामीण आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, मस्टररोल में मजदूरों की उपस्थिति भौतिक सत्यापन के आधार पर ही दर्ज की जानी चाहिए, जिससे किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े की संभावना को कम किया जा सके। मनरेगा का मूल उद्देश्य कार्यों में पारदर्शिता और सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करना है।
भरा गया फर्जी मस्टररोल:
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी भी कार्यस्थल पर मजदूरों को काम करते हुए नहीं देखा। लेकिन सरकारी दस्तावेजों में दर्जनों मजदूरों की रोजाना उपस्थिति दिखाई जा रही है। इस फर्जीवाड़े के जरिए मस्टररोल में नाम दर्ज कर सरकारी राशि की बड़े पैमाने पर निकासी की जा रही है। जबकि सच्चाई यह है कि जिन मजदूरों के नाम पर हाजिरी भरी जा रही है, उन्हें न तो कोई मजदूरी मिली है और न ही इस योजना के तहत रोजगार का कोई अवसर प्राप्त हुआ है। यह सीधे-सीधे सरकारी धन का दुरुपयोग और गरीब ग्रामीणों के अधिकारों का हनन है।
कार्यस्थल से सूचना पटल गायब:
मनरेगा के नियमों के अनुसार, कार्यस्थल पर सूचना पटल लगाना अनिवार्य है। इस पटल पर कार्य से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन मक्के पंचायत में यह बुनियादी पारदर्शिता भी नदारद है। कार्यस्थल पर कहीं भी कोई सूचना पटल नहीं लगाया गया है, जिससे ग्रामीणों को कार्य की प्रगति और उसमें खर्च हो रही राशि के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं, कार्य की निगरानी के लिए भी कोई प्रभावी इंतजाम दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे जिम्मेदारों को फर्जीवाड़ा करने का खुला अवसर मिल गया है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल:
वर्तमान स्थिति यह है कि इस पूरे मामले पर अभी तक कोई स्पष्ट जांच या प्रशासनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जनपद पंचायत और जिला प्रशासन की इस चुप्पी पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस फर्जीवाड़े पर लगाम नहीं लगाया गया तो मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा और जरूरतमंद ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार के फर्जीवाड़े को रोका जा सके और मनरेगा के उद्देश्यों को सही मायने में पूरा किया जा सके।



