अनीश राजपूत बालोद

बालोद कबीर क्रांति

जिले की राजनीति में इन दिनों चलन यह है कि जैसे रेत का घाट चलाना एक नेता का पहचान बन चुका है सरकार किसी की भी हो पर उसके नुमाइंदों को नेता होने का एहसास तभी होता है जब रेत के घाट में उसका वजूद हो।
भाजपा के सरकार रहते भाजपा के जिला स्तर के नेता जनप्रतिनिधि साथ ही दुर्ग भिलाई के मंत्रियों के नुमाइंदे का दबदबा बालोद जिले के खदानों में था परंतु यह सब एक तरफा चलाया जाता था जिसका प्रतिफल अभी सामने आ रहा है अगर छोटे-मोटे कार्यकर्ताओं को भी इसमें शामिल किया जाता तो आज वह कार्यकर्ता इस काबिल रहे थे कि अब जो कांग्रेस के सरकार में रेत के घाट चला रहे हैं उन्हें उनकी हिस्सेदारी भी हो पाती।
अब चूंकि कांग्रेस की सरकार आई है तो मंत्रियों के रिश्तेदार सहित करीबी माने जाने वाले लोग एवं विधायकों के निजी लोग रेत की घाटों के संचालन का जिम्मा उठाए हुए हैं और भाजपा के पास केवल देखते रहने के अलावा कुछ नहीं बचा है क्योंकि यह भाजपा की सरकार थी तो कुछ नेताओं का एकछत्र राज चला था अब वह अपने कार्यकर्ताओं को यह भी नहीं कह सकते कि चलो हम इसका विरोध करते हैं।
कांग्रेस की सरकार में भी एक तरफ जहां मुख्यमंत्री ने रेत के घाट का संचालन बंद कर दिया है तो दूसरी ओर यहां पर ना जाने कौन सी सेटिंग से मौत के घाट संचालित हैं और तो और जिला प्रशासन भी कार्रवाई को लेकर अपने कदम पीछे हट रही है अब इन सब में एक बात सामान्य है कि सत्ता चाहे जिसकी भी हो उसके नुमाइंदे जिले में नेता तभी कहलाएंगे जब रेत के घाटों पर उनका दबदबा हो यूं कह सकते हैं कि सरकार बनी तो नेताओं की पहली पसंद होती है रेत के घाटों का संचालन करना वर्तमान में ग्राम खुटेरी खेरुद पोंड ओरमा नेवारी कला कुछ ऐसे पंचायत है जहां से बेतहाशा रेत निकाले जा रहे हैं

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