भारतीय वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने तेजस से भरी उड़ान: तेजस का दूसरा स्क्वाड्रन आज वायुसेना में हुआ शामिल

नई दिल्ली: एक तरफ जहां भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है तो वहीं चीन, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर हालात को तनावपूर्ण बनाने से नहीं चूक रहा है। बीते कुछ दिनों से चीन के साथ जारी तनातनी के बीच भारतीय वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने बुधवार सुबह तेजस से उड़ान भरी। तेजस का दूसरा स्क्वाड्रन आज यानी बुधवार को वायुसेना में शामिल हुआ है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल भदौरिया ने तेजस के इस लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर इससे वायुसेना में शामिल किया। इसे फ्लाइंग बुलेट्स नाम दिया गया है।
बता दें कि भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने वायुसेना स्टेशन सुलूर में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस लड़ाकू विमान उड़ाया। एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने तमिलनाडु स्थित वायुसेना के स्टेशन सुलूर से सिंगल सीटर तेजस विमान उड़ाया। इससे पहले वायुसेना के एक प्रवक्ता ने कहा था कि स्क्वॉड्रन (बेड़े) में हल्के लड़ाकू विमान तेजस को शामिल किया जाएगा और तेजस विमानों वाली भारतीय वायुसेना की यह दूसरी स्क्वाड्रन होगी।Ad तेजस चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, जिसे एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित किया गया है।
भारतीय वायुसेना ने पहले ही 40 तेजस विमानों का ऑर्डर दिया है और जल्दी ही एचएएल को 83 और विमानों का आर्डर दिया जा सकता है, जिसमें लगभग 38,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। तेजस से लैस दूसरी और वायुसेना की 18वीं स्क्वाड्रन की स्थापना 1965 में की गई थी और इसका आदर्श वाक्य है ‘तीव्र और निर्भय’। पाकिस्तान के साथ 1971 के युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाने वाली इस स्क्वाड्रन को 15 अप्रैल 2016 को सेवामुक्त कर दिया गया था। इससे पहले इसमें मिग-27 विमान शामिल थे।
स्क्वाड्रन को 01 अप्रैल 2020 को पुनः शुरू किया गया था। इस स्क्वॉड्रन को नवंबर 2015 में राष्ट्रपति द्वारा ध्वज प्रदान किया गया था। बीते दिनों लद्दाख में चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने आ गए, जिसके बाद से ही बॉर्डर पर जवानों की संख्या बढ़ाई गई है। इसके अलावा भारत ने भी अपनी क्षमता को उस इलाके में बढ़ाया है।




