कवर्धा

जिले में 2,471 कार्यों पर 82 हजार से अधिक मजदूरों की तैनाती का दावा** मनरेगा मजदूरों के हक पर डाका, मशीनों से कराए जा रहे  है करोड़ों का कार्य** अधिकारी ,नेता, और ठेकेदार कमीशन में मस्त अगर जांच सही होगी तो कई लोग जा सक्ते है जेल,,?  कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

जिले में 2,471 कार्यों पर 82 हजार से अधिक मजदूरों की तैनाती का दावा**

मनरेगा मजदूरों के हक पर डाका,

मशीनों से कराए जा रहे  है करोड़ों का कार्य**

अधिकारी ,नेता, और ठेकेदार कमीशन में मस्त

अगर जांच सही होगी तो कई लोग जा सक्ते है जेल,,? 

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

कवर्धा-  जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर मजदूरी मूलक कार्य संचालित होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। जिले के चारों विकासखंडों बोडला, कवर्धा, पंडरिया एवं सहसपुर लोहारा में हजारों मजदूरों को रोजगार दिए जाने के सरकारी आंकड़े प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जबकि कई पंचायतों में मशीनों से कार्य कराकर कागजों में मजदूरों की उपस्थिति दर्शाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे मनरेगा की

मूल भावना पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले की कुल 471 ग्राम पंचायतों में से 405 पंचायतों में कार्य प्रगति पर बताए गए हैं। जिले में कुल 2,471 मनरेगा कार्यों पर मस्टर रोल जारी होने की जानकारी दर्ज है तथा 82,343 अकुशल

मजदूरों को कार्य में लगाए जाने की संभावना दर्शाई गई है। आंकड़े देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि जिले में बडे पैमाने पर ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन कई स्थानों पर वास्तविकता अलग कहानी बयां कर रही है। सहसपुर लोहारा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कल्याणपुर में संचालित नरवा पुनरुत्थान कार्य पीपरटोला सरहद से सुरेश साहू के खेत तक इसका प्रत्यक्ष उदाहरण माना जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस कार्य में बड़े पैमाने पर जेसीबी मशीन से खुदाई कराई गई, जबकि मनरेगा के नियमों के

सभी मनरेगा कार्यों का सत्यापन कराया जाए

ग्रामीण क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि कई पंचायतों में मस्टर रोल और वास्तविक श्रमिक उपस्थिति के बीच भारी अंतर की जांच की आवश्यकता है। जिले में 2,471 कार्यों और 10,235 मस्टर रोल जारी होने के बावजूद यदि मशीनों का उपयोग हो रहा है तो यह जांच का विषय बनता है कि मजदूरी मद में स्वीकृत राशि का

अनुसार ऐसे कार्य मुख्य रूप से श्रम आधारित होने चाहिए। आरोप है कि मशीन से कार्य पूरा करने के बाद मजदूरी कार्य का स्वरूप

उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि जिले में संचालित सभी मनरेगा कार्यों का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रोजगार वास्तव में मजदूरों को मिला या फिर मशीनों के माध्यम से सरकारी योजना के मूल उद्देश्य को ही दरकिनार कर दिया गया।

दिखाने के लिए केवल कुछ चुनिंदा मजदूरों को मौके पर लगाया गया। इससे वास्तविक जरूरतमंद श्रमिकों को रोजगार से वंचित होना पड़ा।

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

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