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*भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्यों की प्रभारी सचिव ने की समीक्षा, गुणवत्ता और समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश* *मड़वा महल और छेरकी महल के निरीक्षण के दौरान पर्यटन सुविधाओं और ऐतिहासिक जानकारी प्रदर्शित करने पर दिया जोर* कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

*भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्यों की प्रभारी सचिव ने की समीक्षा, गुणवत्ता और समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश*

*मड़वा महल और छेरकी महल के निरीक्षण के दौरान पर्यटन सुविधाओं और ऐतिहासिक जानकारी प्रदर्शित करने पर दिया जोर*

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

कवर्धा, / जिले के ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व वाले भोरमदेव क्षेत्र में स्वदेश दर्शन योजना के तहत 146 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किए जा रहे भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्यों की जिले के प्रभारी सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने भोरमदेव मंदिर परिसर में अधिकारियों की बैठक लेकर परियोजना के विभिन्न कार्यों की प्रगति और आगामी कार्ययोजना की विस्तार से जानकारी ली। बैठक में पर्यटन विभाग के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य भी उपस्थित रहे। 

बैठक के दौरान प्रभारी सचिव ने इस योजना के प्रत्येक घटक की क्रमवार समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों से कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक के बाद प्रभारी सचिव ने निर्माण एजेंसियों के इंजीनियरों एवं ठेकेदारों के साथ पूरे प्रोजेक्ट क्षेत्र का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर चल रहे निर्माण कार्यों का विस्तार से अवलोकन किया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने मड़वा महल और छेरकी महल में जारी विकास एवं निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्देश दिए कि वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले बेस स्ट्रक्चर का कार्य पूर्ण कर लिया जाए, ताकि बारिश के दौरान निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की रुकावट न आए और कार्य लगातार सुचारु रूप से जारी रह सके। 

उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक स्थलों का विकास इस प्रकार किया जाए कि यहां आने वाले पर्यटकों को इस स्थल के ऐतिहासिक महत्त्व और तत्कालीन स्थापत्य कला का अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि इन स्थलों के इतिहास और जानकारी को प्रदर्शित करने के लिए सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि पर्यटक इन धरोहरों के इतिहास और विशेषताओं से परिचित हो सकें। इस दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी, इंजीनियर्स और निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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