कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिए डी एन योगी की रिपोर्ट धान खरीदी केंद्रों में बढ़ते घोटालों ने खड़े किए बड़े सवाल पिछले दो-तीन वर्षों से जिले के धन उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी को लेकर लगातार गड़बड़ियों और घोटालों की शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं तौल में हेराफेरी, कहीं फर्जी रकबा, तो कहीं कागजों में धान खरीदी दिखाकर शासन को लाखों-करोड़ों का नुकसान पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की मॉनिटरिंग इतनी कमजोर क्यों है? जब हर खरीदी केंद्र की निगरानी के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र मौजूद है, तब लगातार सामने आ रही अनियमितताएं कई गंभीर संकेत दे रही हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारियों की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। क्योंकि समितियों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण और वित्तीय गतिविधियों की निगरानी में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बावजूद इसके अगर घोटाले बढ़ रहे हैं, तो यह केवल लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण का खेल — यह जांच का विषय बन चुका है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में धान खरीदी व्यवस्था पर से किसानों का भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। अब जरूरत है कि शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों के हक और सरकारी धन की सुरक्षा हो सके। कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
देखिए डी एन योगी की रिपोर्ट
धान खरीदी केंद्रों में बढ़ते घोटालों ने खड़े किए बड़े सवाल
पिछले दो-तीन वर्षों से जिले के धन उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी को लेकर लगातार गड़बड़ियों और घोटालों की शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं तौल में हेराफेरी, कहीं फर्जी रकबा, तो कहीं कागजों में धान खरीदी दिखाकर शासन को लाखों-करोड़ों का नुकसान पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की मॉनिटरिंग इतनी कमजोर क्यों है? जब हर खरीदी केंद्र की निगरानी के लिए पूरा प्रशासनिक तंत्र मौजूद है, तब लगातार सामने आ रही अनियमितताएं कई गंभीर संकेत दे रही हैं।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के नोडल अधिकारियों की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। क्योंकि समितियों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण और वित्तीय गतिविधियों की निगरानी में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बावजूद इसके अगर घोटाले बढ़ रहे हैं, तो यह केवल लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण का खेल — यह जांच का विषय बन चुका है।
ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आने वाले समय में धान खरीदी व्यवस्था पर से किसानों का भरोसा पूरी तरह उठ सकता है। अब जरूरत है कि शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों के हक और सरकारी धन की सुरक्षा हो सके।
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट



