स्थानीय सदस्यों ने जनपद पंचायत में कमीशनखोरी का खुला खेल चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को केवल “मूकदर्शक” बनाकर रखा गया है। जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रभारी सीईओ शिवकुमार साहु एवं प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी को तत्काल हटाया जाए, ताकि शासन की योजनाओं का संचालन पारदर्शी और सही तरीके से हो सके। कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा में अव्यवस्था का आरोप, जनप्रतिनिधियों में नाराजगी कवर्धा जिले के जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा में शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि प्रभारी सीईओ शिवकुमार साहु एवं प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी के भरोसे पूरा तंत्र चल रहा है, जिसके कारण पीएम आवास, जनमन आवास, मनरेगा सहित विभिन्न निर्माण कार्य भगवान भरोसे संचालित हो रहे हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से सामान्य सभा आयोजित नहीं की गई, जिससे विकास कार्यों पर चर्चा और पारदर्शिता पूरी तरह प्रभावित हो रही है। आरोप यह भी है कि बिना जनप्रतिनिधियों की सहमति और चर्चा के मनमाने तरीके से कार्य कराए जा रहे हैं। स्थानीय सदस्यों ने जनपद पंचायत में कमीशनखोरी का खुला खेल चलने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को केवल “मूकदर्शक” बनाकर रखा गया है। जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रभारी सीईओ शिवकुमार साहु एवं प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी को तत्काल हटाया जाए, ताकि शासन की योजनाओं का संचालन पारदर्शी और सही तरीके से हो सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है। कबीर क्रांति न्यूज़ डी एन योगी, संपादक Spread the love Post navigation छत्तीसगढ़ को मिला नया वन बल प्रमुख अरूण पांडे बने नए PCCF, सरकार ने जारी किया आदेश 31 मई को रिटायर होंगे व्ही. श्रीनिवास राव डीपीसी बैठक के बाद अरूण पांडे के नाम पर लगी मुहर वन विभाग में बड़े प्रशासनिक बदलाव की आहट कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट पोलमी अंतरराज्यीय बैरियर बना “खानापूर्ति” का अड्डा! पुलिस और वन विभाग की गैरमौजूदगी ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल कवर्धा**मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित पोलमी अंतरराज्यीय बैरियर अब सुरक्षा चौकी कम और लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण ज्यादा नजर आने लगा है। जिस बैरियर पर 24 घंटे पुलिस, वन और आबकारी विभाग की संयुक्त निगरानी होनी चाहिए, वहां आज केवल एक गार्ड के भरोसे पूरी सीमा की सुरक्षा छोड़ दी गई है। पुलिस नदारद… वन विभाग गायब… और अवैध गतिविधियों पर रोक केवल कागजों में