कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये पत्रकार दीपक तिवारी की धमाकेदार रिपोर्ट जिले में GST विभाग की कार्रवाई पर फूटा ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का गुस्सा! अब ट्रक मालिक, ड्राइवर और ट्रांसपोर्टर खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जांच के नाम पर कब तक होगा आर्थिक शोषण? सूत्रों के अनुसार हाईवे और चेकिंग पॉइंट पर ट्रकों को घंटों रोककर ई-वे बिल, GST दस्तावेज और माल जांच के नाम पर भारी दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि छोटी-छोटी तकनीकी गलतियों को “बड़ा टैक्स घोटाला” बताकर ट्रक सीज करने और लाखों की पेनाल्टी की धमकी दी जाती है। फिर शुरू होता है “सेटिंग” का खेल! बताया जा रहा है कि मौके पर सक्रिय कुछ कथित बिचौलिये और दलाल मामला रफा-दफा कराने के नाम पर हजारों से लाखों रुपए तक की मांग करते हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि — ई-वे बिल में छोटी गलती गाड़ी नंबर में मामूली अंतर वजन में थोड़ा फर्क दस्तावेज अपडेट न होना जैसी सामान्य तकनीकी त्रुटियों को डर और दबाव का हथियार बनाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि — क्या GST जांच अब भ्रष्टाचार का नया अड्डा बन चुकी है? कई ट्रक चालकों का कहना है कि माल लेट होने से फैक्ट्री, व्यापारी और कंपनी को भारी नुकसान होता है, इसलिए मजबूरी में लोग चुपचाप पैसा देकर निकल जाते हैं। अब व्यापारी और ट्रांसपोर्ट संगठन खुलकर निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और अवैध वसूली पर रोक की मांग कर रहे हैं। जिले में आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह खेल? कौन करेगा ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को न्याय? क्या शासन करेगा सख्त कार्रवाई? जनता जवाब मांग रही है… कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये दीपक तिवारी की धमाकेदार रिपोर्ट

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
देखिये पत्रकार दीपक तिवारी की धमाकेदार रिपोर्ट
जिले में GST विभाग की कार्रवाई पर फूटा ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का गुस्सा!
अब ट्रक मालिक, ड्राइवर और ट्रांसपोर्टर खुलकर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जांच के नाम पर कब तक होगा आर्थिक शोषण?
सूत्रों के अनुसार हाईवे और चेकिंग पॉइंट पर ट्रकों को घंटों रोककर ई-वे बिल, GST दस्तावेज और माल जांच के नाम पर भारी दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि छोटी-छोटी तकनीकी गलतियों को “बड़ा टैक्स घोटाला” बताकर ट्रक सीज करने और लाखों की पेनाल्टी की धमकी दी जाती है।
फिर शुरू होता है “सेटिंग” का खेल!
बताया जा रहा है कि मौके पर सक्रिय कुछ कथित बिचौलिये और दलाल मामला रफा-दफा कराने के नाम पर हजारों से लाखों रुपए तक की मांग करते हैं।
ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि — ई-वे बिल में छोटी गलती
गाड़ी नंबर में मामूली अंतर
वजन में थोड़ा फर्क
दस्तावेज अपडेट न होना
जैसी सामान्य तकनीकी त्रुटियों को डर और दबाव का हथियार बनाया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि — क्या GST जांच अब भ्रष्टाचार का नया अड्डा बन चुकी है?
कई ट्रक चालकों का कहना है कि माल लेट होने से फैक्ट्री, व्यापारी और कंपनी को भारी नुकसान होता है, इसलिए मजबूरी में लोग चुपचाप पैसा देकर निकल जाते हैं।
अब व्यापारी और ट्रांसपोर्ट संगठन खुलकर निष्पक्ष जांच, पारदर्शी कार्रवाई और अवैध वसूली पर रोक की मांग कर रहे हैं।
जिले में आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह खेल?
कौन करेगा ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को न्याय?
क्या शासन करेगा सख्त कार्रवाई?
जनता जवाब मांग रही है…
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