चार महीने से कपड़े में कैद वीरांगना का सम्मान !  कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट कवर्धा शहर के बीचों-बीच स्थापित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पिछले लगभग 4 महीनों से कपड़े में ढंकी खड़ी है। जिस वीरांगना ने अपने स्वाभिमान के लिए मुगलों के सामने झुकने के बजाय वीरगति को चुना, आज उनकी प्रतिमा प्रशासनिक उदासीनता की शिकार बनी हुई है। हैरानी की बात यह है कि प्रतिमा के आसपास ही कलेक्टर कार्यालय, एसपी कार्यालय, जिला अस्पताल और न्यायालय जैसे बड़े सरकारी दफ्तर मौजूद हैं… यानि जिम्मेदारों की नजर रोज पड़ती है, लेकिन कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं देती। ? सवाल यह है कि क्या आदिवासी समाज की भावनाओं की कोई कीमत नहीं? क्या सिर्फ प्रतिमा लगाने और उद्घाटन करने तक ही सम्मान सीमित है? खंडित प्रतिमा को महीनों तक कपड़े में ढंककर छोड़ देना क्या वीरांगना का अपमान नहीं?  16वीं शताब्दी की महान योद्धा रानी दुर्गावती आज भी साहस, स्वाभिमान और बलिदान की मिसाल मानी जाती हैं। लेकिन कवर्धा में उनकी प्रतिमा की यह हालत कई सवाल खड़े कर रही है।  स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग — प्रतिमा की तत्काल मरम्मत हो  सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापना की जाए  दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो  विकास के बड़े-बड़े दावे करने वालों को यह भी याद रखना होगा कि “किसी समाज की अस्मिता का सम्मान ही असली विकास की पहचान है।” कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

D.N. Yogi

ByD.N. Yogi

May 14, 2026

चार महीने से कपड़े में कैद वीरांगना का सम्मान ! 

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़

देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

कवर्धा शहर के बीचों-बीच स्थापित वीरांगना रानी दुर्गावती की प्रतिमा पिछले लगभग 4 महीनों से कपड़े में ढंकी खड़ी है।

जिस वीरांगना ने अपने स्वाभिमान के लिए मुगलों के सामने झुकने के बजाय वीरगति को चुना, आज उनकी प्रतिमा प्रशासनिक उदासीनता की शिकार बनी हुई है।

हैरानी की बात यह है कि प्रतिमा के आसपास ही कलेक्टर कार्यालय, एसपी कार्यालय, जिला अस्पताल और न्यायालय जैसे बड़े सरकारी दफ्तर मौजूद हैं…

यानि जिम्मेदारों की नजर रोज पड़ती है, लेकिन कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं देती।

? सवाल यह है कि

क्या आदिवासी समाज की भावनाओं की कोई कीमत नहीं?

क्या सिर्फ प्रतिमा लगाने और उद्घाटन करने तक ही सम्मान सीमित है?

खंडित प्रतिमा को महीनों तक कपड़े में ढंककर छोड़ देना क्या वीरांगना का अपमान नहीं?

 16वीं शताब्दी की महान योद्धा रानी दुर्गावती आज भी साहस, स्वाभिमान और बलिदान की मिसाल मानी जाती हैं।

लेकिन कवर्धा में उनकी प्रतिमा की यह हालत कई सवाल खड़े कर रही है।

 स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग — प्रतिमा की तत्काल मरम्मत हो

 सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापना की जाए

 दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो

 विकास के बड़े-बड़े दावे करने वालों को यह भी याद रखना होगा कि

“किसी समाज की अस्मिता का सम्मान ही असली विकास की पहचान है।”

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

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