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कलेक्टर–विधायक का नहीं रहा भय?
विधायक निधि से बन रहा सामुदायिक भवन गंभीर संदेह के घेरे में

पंडरिया।
आगरपानी बस्ती में विधायक निधि से स्वीकृत करीब 10 लाख रुपए के सामुदायिक भवन का निर्माण अब भ्रष्टाचार, लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण के आरोपों से घिर चुका है। निर्माण स्थल पर मिल रही काली रेत, मिट्टी-मिश्रित घटिया सामग्री, मानक सेंट्रिंग का अभाव और गुणवत्ता की अनदेखी ने पूरे काम को शक के घेरे में ला खड़ा किया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है — “यह सिर्फ लापरवाही नहीं, यह संगठित भ्रष्टाचार है।”

घटिया निर्माण सामग्री — भवन की उम्र शुरू होने से पहले ही सवालों में

निर्माण के स्वीकृत स्टीमेट और मानकों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाली रेत, झड़ और सटीक सेंट्रिंग का प्रयोग अनिवार्य है।
लेकिन मौके पर दिखाई दे रहा काम इन मानकों से मीलों दूर है।
ग्रामीणों का आरोप है कि—
➡️ दीवारों में मिलावटी सामग्री
➡️ वर्षा में गिरने का खतरा
➡️ सार्वजनिक धन का खुला दुरुपयोग

यह सब देखकर स्पष्ट होता है कि गुणवत्ता से समझौता जानबूझकर किया गया है।

सूचना पटल गायब — भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश?

सरकारी नियमों के अनुसार हर निर्माण स्थल पर
✔️ लागत
✔️ एजेंसी
✔️ समयावधि
✔️ तकनीकी विवरण
का सूचना पटल अनिवार्य है।
लेकिन आगरपानी के साइट पर सूचना पटल गायब है।
यह सीधा संकेत है कि पारदर्शिता की हत्या की जा रही है ताकि गलतियों को जनता से छुपाया जा सके।

ग्राम पंचायत और सरपंच पर गंभीर आरोप

सूत्रों का दावा है कि निर्माण जिम्मा ग्राम पंचायत आगरपानी और उसके प्रतिनिधि सरपंच पर है।
ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं—
➡️ सस्ती व निकृष्ट सामग्री की खरीद
➡️ निर्माण एजेंसी से मिलीभगत
➡️ धन का लेन-देन और लाभ का खेल

यह आरोप पंचायत व्यवस्था और जनता के भरोसे को गंभीर चोट पहुँचाते हैं।

R.E.S. विभाग की चुप्पी और लापरवाही पर सवाल

R.E.S उपसंभाग पंडरिया पर ग्रामीणों ने आरोप लगाए हैं कि—
▪️ तकनीकी सहायक मौके पर नहीं आते
▪️ निरीक्षण सिर्फ कागजों में होता है
▪️ भौतिक सत्यापन न के बराबर
▪️ विभागीय संरक्षण से भ्रष्टाचार को बल

स्थल निरीक्षण की कमी गुणवत्ता गिराने का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

प्रशासन की साख दांव पर — कलेक्टर कार्यालय की चुप्पी चर्चा में

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि—
कलेक्टर कार्यालय का कंट्रोल कहां है?
निगरानी में लापरवाही ने ग्रामीणों में यह विश्वास मजबूत किया है कि प्रशासन की चुप्पी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।

ग्रामीणों की मांग — “जांच हो, दोषी पकड़े जाएं”

आगरपानी के लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है—
✔️ निर्माण का त्वरित भौतिक सत्यापन
✔️ सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण
✔️ पूरी परियोजना की पुनः जांच
✔️ दोषियों पर सख्त कार्रवाई
✔️ सूचना पटल तत्काल लगाया जाए

ग्रामीण चेतावनी दे रहे हैं कि यदि प्रशासन अब भी उदासीन रहा, तो यह मामूली भवन नहीं बल्कि सार्वजनिक धन और जनहित के साथ बड़ा धोखा साबित होगा।

कवर्धा से देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़

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