आग की ढेर में सरकारी धान, कभी भी हो सकती हैं अनहोनी**डी एन योगी कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़

कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट
आग की ढेर में सरकारी धान, कभी भी हो सकती हैं अनहोनी**डी एन योगी कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
कवर्धा , कबीरधाम जिले में हजारों की संख्या में गुड़ उद्योग के नाम संचालित हैं लेकिन नब्बे फीसदी उद्योगों में गुड़ के बजाए सिरा बनाकर बेचते हैं। जहां पर सरकारी नियम कायदों को दरकिनार कर संचालित किया जा रहा है। बाल श्रम , महिलाओं को चरका,आग की भट्टी जैसे कार्य लिया जा रहा है। बोड़ला विकासखंड के बोड़ला रोड सिंघारी में लक्ष्मी गुड उद्योग संचालित है । गुड उद्योग से लगा हुआ धान उपार्जन केंद्र है जहां पर हजारों क्विंटल धान किसानों से खरीदा गया है। गन्ना की छिलका (कूट)को खरीदी केंद्र तक सुखाया जाता हैं। जिससे कभी भी बड़ी अनहोनी होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता साथ ही जंगल के समीप भी है। पता नहीं इसे जगह पर गुड उद्योग संचालन की अनुमति कैसा मिल गया या फिर बिना अनुमति के संचालित है जो जांच का विषय है।
पीछे धान खरीदी केंद्र सामने जंगल
धान खरीदी केंद्र सिंघारी में आसपास के गांवों का धान की खरीदी किया जाता था और बाजू में वेयर हाउस का गोदाम भी है वहीं पर लक्ष्मी गुड उद्योग संचालित है और उद्योग के ठीक सामने दलदली रोड है फिर सागौन का प्लॉट लगा हुआ है। हजारों क्विंटल धान की खरीदी किया गया लेकिन परिवहन नहीं होने के कारण वहीं पर स्टोरेज है उसी के बाजू में वेयर हाउस का गोदाम भी है जहां। पर भी उचित मूल्य की दुकानों के लिए चावल संग्रहित है ।
माप दंड का पालन नहीं
लक्ष्मी गुड उद्योग में शासन के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है नियमानुसार महिलाओं से रात्रि में कार्य नहीं लिया जाना होता हैं लेकिन जिले में संचालित गुड उद्योग में लिया जा रहा है साथ ही परिवार के साथ आए नाबालिग बच्चों से भी कार्य कराया जाता है। जिस पर जांच कर कार्यवाही करने के आवश्यकता है। महिलाओं और बच्चों से कठोर कार्य लिया जाता हैं जो कानूनी अपराध की श्रेणी में आता है ।
जांच की आवश्यकता
उक्त गुड उद्योग जंगल के समीप है जिसके चलते पर्यावरण ,प्रदूषण विभाग की अनुमति जरूरी हैं। पता नहीं अनुमति मिला है कि नही ये तो जांच का विषय है। छोटे छोटे बच्चों और महिलाओं से रात में भी कठोर और जोखिम भरा कार्य कराया जाता हैं। वहां पर कार्य में लगे श्रमिकों का बीमा भी नहीं किया जाता और न ही उनका जानकारी संबंधित थाने में दिया जाता हैं। सरकारी आंकड़ा भी जिम्मेदार विभाग के पास नहीं हैं।




