निचे लिखे लेख आज के युवक युवती की सोच का परिवार समाज और सामाजिक परिस्थिति पर पड़ता प्रभाव…

निचे लिखे लेख आज के युवक युवती की सोच का परिवार समाज और सामाजिक परिस्थिति पर पड़ता प्रभाव…
*यदि किसी कन्या को किसी लड़के के साथ ‘प्रेम विवाह’ करना हो तो कन्या को वेटर, लेबर, कंडक्टर, ड्राइवर, रिक्शा चालक, मेकेनिक, पंचर वाला और यहाँ तक कि अन्य समाज और दूसरे पंथ, संप्रदाय (धर्म) का भी चल सकता है !*
*किंतु यदि सामाजिक विवाह (अरेंज मैरिज) करनी है तो कन्या व कन्या के परिवार को लड़के की अच्छी सरकारी नौकरी, बढ़िया व्यापार, बढ़िया घर या फ्लैट, कार, प्रौपर्टी, नौकर, चाकर, बैंक बैलेंस सब चाहिए !*
*और हाँ सामाजिक विवाह में जींस टॉप पहनने की जिद करने वाली कन्या प्रेम विवाह में बुरखा भी पहनने को तत्पर रहती है !*
सामाजिक विवाह (अरेंज) में सास और ननद नहीं होनी चाहिए पर प्रेम विवाह में गंदी नीयत वाले जिहादी ससुर, जेठ, देवर सब चलते हैं। यह स्थिति है आज के युवा-समाज की, व परिवार की, जरा सोचिए और हर संभव प्रयास कीजिए की अपनी अगली पीढ़ी को संस्कार, धर्म, परिवार का महत्व समझा सकें और उनका भविष्य नर्क बनने से बचा सकें..
*केवल गधे के जैसे धन कमाने के पीछे भागने को ही जीवन नही दिया है ईश्वर ने आपको ।*

