अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेषः,

परिवारिक जिम्मेदारियों के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती महिलाएं

महात्मा गांधी नरेगा योजना से महिलाओं को मिला कार्य करने का समान अवसर

कवर्धा, । ऐसा समय भी हुआ करता था जब महिलाओं को चार दिवारी के अन्दर चूल्हा- चौका एवं घर की देख-रेख करने तक ही समाज का नजरिया था। मानव जाति के आधी आबादी को सिर्फ उनके घरों के काम से देखा जाता था। लेकिन यह शक्ति रूपी महिलाओं का ही जस्बा ही था कि समाज का नजरिया समय के साथ बदलता गया। आज महिलाएं अपने घरों की जिम्मदारियों को बखूबी निभाते हुए अपने घर के आर्थिक तरक्की में पुरूषों के साथ समान रूप से सहभागी हो रहीं है। ग्रामीण भारत के महिलाओं को आर्थिक रूप से उन्नत बनानें के लिए यू तो बहुत सी योजनाएं चल रहीं है। लेकिन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से ग्रामीण भारत की महिलाओं को एक अलग सा आत्मबल मिला है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जिले में योजना अंतर्गत मेट के रूप में का महिलाओं का कार्य करना एवं निर्माण कार्य मे इनकी भादीगारी। नारी शक्ति मनरेगा योजना की सहायता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में बहुमूल्य योगदान दे रहीं है।

ग्रामीण क्षेत्रों के निर्माण कार्यो में महिलाओं की भूमिका मेट के रूप में
महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले कार्यो में श्रमिकों के कार्यो का नापझोक एवं मस्टररोल इत्यादी भरने का कार्य मेट के द्वारा किया जाता है। जिले में कुल 3082 मेट में से 1366 महिलाएं मेट के रूप में कार्यरत है, जिन्हें प्रतिदिन 197 रूपयें के दर से मानदेय भुगतान होता है। 40 श्रमिकों की एक टोली पर मेट अपनी सेवाएं देती है। इस प्रकार ग्रामीण महिलाओं को महात्मा गांधी नरेगा योजना के द्वारा मेट के रूप में स्थायी रोजगार का सुअवसर गांव में मिला है। मेट के रूप में चयनीत महिलाओं को जनपद पंचायत स्तर पर प्रशिक्षित करते हुए कार्यो के लिए तैयार किया गया। इस तरह आज पुरूषों के साथ मेट के रूप में महिलाएं कन्धे-से कन्धा मिलाकर काम कर रहीं है।

पुरूषो के साथ मिलाकर रेजगार करती ग्रामीण महिलाएं

ग्रामीण भारत में महात्मा गांधी नरेगा योजना रोजगार प्रदान करने के लिए जाना जाता है। चालू वित्तीय वर्ष में 83 लाख 38 हजार 504 मानव दिवस रोजगार का सृजन किया गया जिसमें महिलाओं को 40 लाख 19 हजार 883 मानव दिवस रोजगार का अवसर मिला है। महिलाओं को मिला रोजगार का अवसर दिखाता है कि आज महिलाएं शहर हीं नही वरन ग्रामीण क्षेत्रों में भी पुरूषों के साथ कन्धे-से कन्धा मिलाकर घर से बाहर निकलकर अपने परिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए रोजगार कर रहीं है। इन कार्यो के एवज में मनरेगा योजना से महिलाओ को चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 62 करोड़ रूपये से अधिक का मजदूरी भुगतान उनके खाते में अंतरित हुआ है। जो सीधे तौर पर महिलाओं का आर्थिक रूप से तरक्की करने को प्रदर्षित करता है।

जरूरत के समय मातृत्व भत्ता से मिलता सहारा!

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत महिला श्रमिक जो विगत 12 माह में कम से कम 50 दिवस कार्य किये हो उन्हें 1 माह का मातृत्व भत्ता से लाभान्वित किया जाता है। यहां भत्ता राज्य शासन द्वारा महिला श्रमिक के बैंक खाते में सीधे अंतरित किया जाता है । जिले की महिलाएं मातृत्व के दौरान राज्य शासन द्वारा दिए जाने वाले मातृत्व भरता से लाभान्वित हो रही है।

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