
नाथ संप्रदाय के सनातन इष्टदेव
|| जगतगुरु शिव गोरक्षनाथ जी ||
कवर्धा,डी एन योगी,9425558295
कवर्धा,, कबीर क्रांति,,,महायोगेश्वर सच्चिदानंद परमानंद स्वरुप
सदाशिव जगतगुरु गोरक्षनाथ अनादि पुरुष कहलाते हैं,
आज भी वे इस ब्रह्माण्ड में विद्यमान हैं,
वे इस भूमण्डल पर बालजति स्वरूप बन कर आये,
और अलख निरंजन बन कर अदृश्यमान है।
विरलों को उनके साक्षात् दर्शन आज भी होते हैं।
ऐसे अजर ,अमर,अक्षय, अटल,अनुपम,अलख,निरंजन,
निराकार, साकार,सगुण, निर्गुण, प्रकट,अदृश्य,
सर्वव्यापक,घट घट व्यापी,युग युगांतरों के साक्षी,
जन्म -मरण से परे परब्रह्म परमात्मा के सम्बन्ध में
उनके जन्म -मृत्यु ,देश-काल,
घर-परिवार ,कुल-वंश, आयु आदि
लौकिक जानकारियां खोजना आज तक असंभव है,
जन्म मरण, आवागमन से मुक्त सदाशिव
जगतगुरु गोरक्षनाथ जी नित्य निरंतर प्रगट है है।
सम्पूर्ण प्राणी मात्र का मर्म उनमें केंद्रित है।
सबका ह्रदय उनकी वाणी में अभिव्यक्त है ।
आकाश उनका छत्र, वायु उनका चंवर,
धरती उनका सिंहासन, प्राणी मात्र उनका दरबारी है।
अखिल ब्रह्माण्ड उनका राज्य और
अलख निरंजन उनका आत्म सवरूप है।
वे परमपुरुष , महापुरुष,नित्य पुरुष और
अक्षयपुरुष है,जिनका प्रसाद पाकर
यह संसार आज भी लोकमंगल को प्राप्त कर रहा हैं।
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महाकाल योगशास्त्र कल्पद्रुम में,
देवताओं के पूछने पर गोरक्षनाथ कौन है ?
इस बात का उत्तर स्वयं महेश्वर आदिनाथ कहतें हैं –
*अहमेवास्मि गोरक्षो , मद्रूपं तन्निबोधत।*
*योगमार्गप्रचाराय मया रूपमिदम् धृतम्।I*
“हे देवताओं मैं ही गोरक्षनाथ हूँ,
मेरे से पृथक नहीं, प्राणियों को मृत्यु के मुख में
जाते हुए देख मैंने योगमार्ग के प्रचारार्थ
इस रूप को धारण किया है”
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शिवपुराण में ब्रह्मा जी ने भगवान शिव के
अवतारों के वर्णन संख्या में
जगतगुरु गोरक्षनाथ को शिवावतार बतलाया है –
*शिवो गोरक्षरूपेण , योगशास्त्रम् जुगोप ह |*
*यमाध्यअङ्गै यर्थास्थाने , स्थापिता योगिनोउपि च ||*
भगवान सदाशिव गोरक्ष रूप में प्रगट हो कर,
योग और योगियों की रक्षा की तथा
योगशास्त्र की सत्यता को यम नियम
आदि अंगो द्वारा प्रमाणित किया।
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गर्ग ऋषि द्वारा बताये गए ”श्री गोरक्ष सहस्र नाम”
का एक श्लोक,
*माता शून्यमयी तस्य व्यवहारमय पिता |*
*निरंजनो महायोगी गोरक्षो जगतो गुरु : ||*
गुरु गोरक्षनाथ जी महाराज जगतगुरु हैं,
क्योंकि वे निरंजन हैं स्वयं सदाशिव है !
निरंजन का अर्थ होता है निर्विकार !
अर्थात श्री गोरक्षनाथ जी महाराज में,
जन्म-मरण का विकार नहीं है, देश काल का विकार नहीं है,
वे आकार-विकार से रहित हैं !
ऐसे त्रिकालाबाधित, सर्वकालिक निर्विकार,
निराकार, निरंजन अविनाशी व्यक्तित्व के धनी
ही सदा सर्वकालिक सनातन सार्वभौमिक गुरु
अर्थात वास्तविक जगतगुरु हैं.
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इन सभी तथ्यों से स्पष्ट होता है की,
भगवान सदाशिव आदिनाथ जी ने ही,
लोक कल्याण और योग मार्ग के उद्धार हेतु गोरक्ष रूप धारण किया,
जैसा की हम सभी जानते है के भगवान शिव का
न कोई जन्म दिवस है, न जयंती,
तोह फिर उन्ही के स्वरुप “गोरक्षनाथ जी” की
जयंती या जन्मदिवस कैसे हो सकता है?
*वैशाखी शिव पूर्णिमा तिथिवरे वारे शिवे मंगले |*
*लोकानुग्रह विग्रह: शिवगुरु गोरक्षनाथोSभवत ||*
*गोरक्षा चल गह्वरेअतिरुचीरे कैलाश्शेला अधरे |*
*दिव्य द्वाद्श वार्षीकेण वपुषा वासा स्वयम ||*
*- गोरक्षअवतार कथामृत*
सतयुग के प्रारंभ में वैशाख पूर्णिमा मंगलवार के दिन
योगानुग्रह द्वारा, सकल लोकों का मंगल करने वाले
सकल सिद्धों के गुरु शाक्षात भगवान शिव कैलाश पर्वत के अधर देश में,
गोरक्षाचल पर्वत की एक गुफा में, पद्मासन योगमुद्रा में,
बारह वर्ष के बालक के रूप में गैरिक परिधान धारण कर प्रकट हुए ,
और माता पार्वती का भ्रम मिटा कर उन्हें योग मार्ग में प्रेरित किया |
जिस प्रकार “महा शिवरात्रि” को भगवान शिव ने,
ब्रह्मा तथा विष्णु के समक्ष ज्योतिर्लिंग रूप
में प्रगट हो उन्हें उपदेशित किया,
उसी प्रकार वैशाख पूर्णिमा के दिवस,
भगवान आदिनाथ शिव,
बालजति गोरक्ष रूप में प्रगट हुए थे,
अर्थात यह जन्म दिवस नहीं,
पर अक्षय प्रागट्य दिवस है,
कुछ लोग वरुथनी एकादशी तथा अन्य दिवसों
पर गोरक्षनाथ जी का जन्म दिवस मनाने लगे है,
जिसे नाथ सम्प्रदाय प्रमाणित नहीं करता,
नाथ सम्प्रदाय में महा शिवरात्रि तथा गोरक्ष पूर्णिमा
(वैशाख पूर्णिमा) तथा गुरुपूर्णिमा का ही विशेष महत्त्व है,
और इन तिथिओं पर ही विशेष उत्सव आयोजन
का अनुरोध करता है.
*लिखीतं – योगी अवंतिकानाथ,*
*गुरु श्री श्री १०८ महंत योगी*
*श्री तुलसीनाथ जी महाराज.*
शिवगोरक्ष सर्वोपरि,
सिद्धों गुरुवरो को आदेश,
श्री नाथजी गुरुजी को आदेश,
आदेश आदेश अलख अतित,
सदाशिव गोरक्षनाथ जी को आदेश
*|| श्री गोरक्षनाथो विजयतेतराम ||*
,,डी एन योगी एडीटर इन चीफ कबीर क्रांति कवर्धा 9425558295,




