बाबा जी ने सत्य की आराधना और समाज में नई जागृति पैदा की है – नीलू चंद्रवंशी

बाबा जी ने सत्य की आराधना और समाज में नई जागृति पैदा की है – नीलू चंद्रवंशी
कवर्धा :- जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 10 के ग्राम दुल्लापुर नेवारिगुढा में संत शिरोमणि परम् पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी की जयंती अवसर पर सांस्कृतिक छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर मुख्य रूप से जिला कांग्रेस कमेटी कबीरधाम के अध्यक्ष श्री मिलु चंद्रवंशी जी, रवेली के राजा श्री मोहेंद्र शाह जी, प्रदेश किसान कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री लालबहददुर चंद्रवंशी जी, श्री दिलीप चंद्रवंशी जी, श्री घुरूवा चंद्रवंशी जी, ग्राम पंचायत कारीमाटी के सरपंच श्री दिनेश धुर्वे जी, श्री किरण शर्मा जी, ग्राम दुल्लापुर के सतनामी समाज एवं समस्त ग्रामवासी की उपस्तिथि में बाबा जी की जयंती मनाई गई।
बाबा जी की जयंती कार्यक्रम संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष नीलू चंद्रवंशी जी ने कहा कि गिरौदपुरीधाम सतनाम धर्म के लिए पवित्र स्थल है क्योकि इस पावन धरा में सतपुरूष संतशिरोमणी गुरू बाबा घासीदास जी का जन्म 1756 ई.हुआ था। गिरौदपुरी कसडोल तहसील जिला,बलौदाबाजार में प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरती विशाल पहाड़,सघन वन,जीवनदायनी जोक नदी व गुरू बाबाघासीदास के महिमा को प्रमाणित करते हुए सतनाम की सुगंध फैलाते स्थित है, गिरौदपुरी बाबा जी का तपोभूमि के रूप में विश्वविख्यात है, गुरू बाबा घासीदास को सतनाम का बोध छाता पहाड़ में तपस्या करने से हुआ,सतनाम रूपी अमृत को पाकर अनेको चमत्कारिक कार्य कर सतनाम की महिमा दिखाए है। गुरू बाबा घासीदास जी के सतनाम वाणी, विचार, संदेश, जीवन चरित्र,सतकार्यो व सतनामधर्म की यश किर्ती को संसार में अजर-अमर बनाने गुरू बाबा घासीदास जी के चैथा वंशज गुरूगोसाई अगमदास जी के द्वारा सन् 1935 में गिरौदपुरी मेला का शुभारम्भ किया गया। गिरौदपुरीधाम का मेंला का संचालन गुरू बाबा अगमदास जी ने सन् 1954 तक तत्पश्चात ममतामयी मिनीमाता व राजराजेश्वरी करूणा माता संयुक्त रूप से सन् 1960 तक उसके बाद से राजराजेश्वरी करूणा माता के संरक्षण में प्रतिवर्ष फागुन शुक्ल पंचमी,छट व सात को तीन दिवसीय एतिहासिक गुरूदर्शन मेंला लगता है जहा पर सतनामी समाज के साथ ही सभी धर्मो के लोग देश विदेश से 50 लाख से अधिक श्रद्वालु गुरूदर्शन के साथ बाबा जी के जन्म स्थान, सफुरामठ, छातापहाड़, बाघमाड़ा, अमृतकुण्ड, चरणकुण्ड ,पचकुण्डी, विशालकाय गगनचुंबी जयस्तंभ व जोकनदी आदि पुज्यनीय दर्शनीय स्थल का प्रतिदिन लाभ लेते है।


