रतनपुर लाये गए 123 मजदूरों ने मचाया हंगामा, अधपके चावल होने का हवाला देकर फेंक दिया खाना , प्रशासन को करनी पड़ी मिन्नत

रतनपुर लाये गए 123 मजदूरों ने मचाया हंगामा, अधपके चावल होने का हवाला देकर फेंक दिया खाना , प्रशासन को करनी पड़ी मिन्नत
रतनपुर पूरे प्रदेश में फैलते संक्रमण के बावजूद अब भी लगातार प्रवासी मजदूरों को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लाया जा रहा है। इन्हें कोरेंटिन सेंटर में ठहराया जा रहा है । कोरेंटिन सेंटर में ठहराये गए मजदूरों की डिमांड खत्म होने का नाम नहीं ले रही। रविवार को मस्तूरी और अन्य क्षेत्रों के प्रवासी मजदूरों के बिलासपुर पहुंचने के बाद उन्हें रतनपुर गांधीनगर के पास मौजूद शासकीय महामाया विद्यालय में बनाए गए कोरेंटिन सेंटर में रखा गया है । यहां कुल 123 श्रमिक लाए गए हैं, लेकिन यहां आते ही उनकी फरमाइशे शुरू हो गई ।
भोजन के पैकेट फेंका
किसी को कमरा पसंद नहीं आया , किसी को शौचालय से शिकायत थी तो किसी को नाश्ता और भोजन का स्वाद पसंद नहीं आया । चावल के अधपके होने की शिकायत करते हुए मजदूरों ने न सिर्फ भोजन के पैकेट फेंक दिये बल्कि जमकर हंगामा भी मचाया। जिसकी खबर पाकर स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ विजय चंदेल भागे भागे कोरेंटिन सेंटर पहुंचे और मजदूरों को स्वादिष्ट खाना देने के साथ उनके बच्चों के लिए बिस्किट और दूध देने का वादा किया तब जाकर मजदूर शांत हुए। इधर इस दौरान कुछ मजदूरों की तबीयत बिगड़ने की भी खबर है । मस्तूरी क्षेत्र की दर्री निवासी लताबाई चतुर्वेदी की तबीयत रविवार को बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें बिलासपुर भेजने की तैयारी की जा रही है । मजदूरों को यह समझना होगा कि घर वापस आने का फैसला उनका अपना था । उन्हें किसी ने निमंत्रण देकर नहीं बुलाया है और ना ही उनका सेवा सत्कार करना किसी का कर्तव्य है। जनता के टैक्स के पैसे और लोगों के दिए गए दान से उनकी खातिरदारी की जा रही है , इसलिए बेजा मांग और तोड़फोड़ जैसी हरकतों से उन्हें बाज आना चाहिए । वैसे ही इन मजदूरों की वजह से पूरे प्रदेश में संक्रमण तेजी से फैल रहा है और इन्हें लेकर लोगों में गुस्सा है। ऐसे में अगर इनकी हरकतें इस तरह की होंगी तो एक दिन मजदूरों को लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ेगा और फिलहाल जो सहानुभूति मजदूरों के साथ है वह भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।




