मदर्स डे मतलब वर्ष में अति व्यस्त दिन में एक दिन मां के नाम मां कभी भी बेटा दिवस नहीं मनाती ना ही आपने सुना होगा कारण यह कि उसके लिए वर्ष के पूरे 365 दिन बेटा या बेटी स्पंदन के रूप में जुड़े रहते हैं,,सुनिल योगी
आधुनिकता की इस दौड़ में बेवजह पाली गई व्यस्तता का बहाना करके कई सपूत मातृ दिवस के हिस्से कर लेते हैं! एकल पुत्र मां तो और भी चिंतित नजर आती है !उसकी डोर बहुत नाजुक होती है ,पुत्र के हिस्से स्वयं काट काट कर करती है! पहला हिस्सा उसकी शादी करके खुद बहू को सुपुर्द करती है! कालांतर में फिर हिस्सा काट के पोते पोतियो के सुपुर्द करती है !लेकिन उसका प्यार एवं आशीर्वाद सदा सभी हिस्सों पर बराबर रहता है! लेकिन वह कटे हिस्से अपनी मां की ममता संवेदना भूलते जारहे हैं !और मुख्य हिस्सा( पुत्र) चक्की के पाट में पीसा नजर आता है!
यह जीवन का कटु सत्य है

खुश नसीब है
वह लोग जिन की झोली में मातृशक्ति प्रेम तीनों ओर से बरस रहा हो जन्म देने वाली मां और सवारने वाली पत्नी ख्याल रखने वाली पुत्री,
ग्रुप के सम्मानित सदस्य मेरे मित्र देवास डीएसपी अनिल सिंह जी राठौर एवं हीरालाल जी गोस्वामी अक्सर कहते हैं, हमें गर्व है
मैं दो लड़कियों के पिता है
और हमे मातृशक्ति का सहयोग आशीर्वाद सतत मिलता है !आज मदर्स डे पर सभी खुशनसीब लोगों को बहुत-बहुत बधाई मैं गर्व से कहता हूं आज भी कई प्रमुख अवसरों पर मेरी मां के हाथ का खाना नसीब होता है
प्यार दुलार के साथ 365 दिन आशीर्वाद प्राप्त होता है परिवार के रूप में पत्नी एवं बच्चीयो का सहयोग दुलार मातृशक्ति की कल्पना को साकार करता है मां कहीं जाती नहीं है
वह जहां भी रहती है बच्चों को आशीर्वाद देती है आप सभी मातृत्व प्रेम मातृत्व सीख एवं आंचल दुलार वंदन का कर्ज़ निभाते रहे मातृत्व शक्ति का सम्मान करते रहे चाहे वह जन्मदाता के रूप में हो पवित्र बंधन के रूप में हो या लाडली बिटिया के रूप में हो वैसे मातृशक्ति के अनेक रूप हैं
भुआ, काकी मामी, भाभी, आदि सभी मधुर रिश्तो को बारंबार नमन संयुक्त समाज परिकल्पना सनातन धर्म में हमें यही सिखाती है अंत में हे मां आपकी आशीर्वाद छाया सभी रूप में आशीर्वाद बरसाती रहे
जिन लोगों की माता यदि अन्य स्थान पर हो तो आज कम से कम मोबाइल करके कुशल क्षेम अवश्य पूछ ले या दिल से याद कर ले वह जहां भी है आपकी अभिलाषा की प्यासी है!
मैंने 3 माह पूर्व एक दृश्य देखा था उस दृश्य में अदृश्य क्या छिपा था यह आज बता रहा हूं मेरे मित्र गौरीशंकर जोधा जो वर्तमान में रतलाम पत्रिका कार्यालय में रिपोर्टिंग का काम करते हैं उनका स्थानतरण जयपुर हो गया तब वह मां से मिलकर जा रहे थे उस वक्त मां की आंखों में निकले आंसू यह कह रहे थे हो सकता है यह लंबी जुदाई हो और हुआ भी यही उनके जाते ही लाख डाउन शुरू हुआ और वह जयपुर में फंस गए उनकी पत्नी एवं पुत्री रतलाम माता एवं पुत्र बागली वह स्वयं अकेले जयपुर आज मातृत्व दिवस पर शासन प्रशासन की अनुमति मदद से वह अपने घर पहुंच गए हैं यह रहती है मां की भावना जो पहले से पहचान जाती है

उन्हें भी इस अवसर पर बधाई ✍️

सुनिल योगी,

,डी एन योगी एडीटर इन चीफ कबीर क्रांति,छत्तीसगढ़,9425558295

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