कवर्धादुर्ग

बेलर मशीन के सहयोग से ग्रामीण कर रहे पैरादान

कवर्धा,। सुराजी गांव योजना से लोगों के जुड़ाव का ही नतीजा है कि ग्रामीण स्वंय आगे आकर अपने खेतों का पैरादान गौठान के लिए कर रहें है। जिले के बहुत से ग्रामीण अपने स्वेच्छा से पैरादान कर रहें है। आधुनिक तकनीक हारवेस्टर मशीन से कटने वाले धान का पैरा जो पहले उपयोग में नहीं आ पा रहा था उसे बेलर मशीन के सहयोग से बंडलींग बनाते हुए गौठान के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। जिससे की गौठान में आने वाले पशुधन को साल भर चारा सहज रूप से उपलब्ध हो। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री विजय दयाराम के. ने जानकारी देते हुए बताया की ग्राम बिरकोना से विद्या बाई पति घुनारी ने अपने डेढ़ एकड़ खेत के पैरा को आदर्श गौठान बिरकोना के लिए दान दिया है। इसी तरह बिरकोना से ही राम निहोर पिता सुकालु ने अपने एक एकड़ खेत का पैरा दान कर दिया है। अब-तक बेलर मशीन के द्वारा पैरे का 105 बंडल तैयार किया गया है, तथा प्रति बंडल 15 किलो के मान से है। अब तक 15.75 क्विंटल पैरा का दान ग्रामीणां द्वारा किया गया है।
जिला पंचायत सीईओ श्री विजय दयाराम के ने बताया की जिले को बेलर मशीन, रायपुर कृषि यांत्रिकी विभाग से मिला है। इस मशीन का मुख्य उपयोग हारवेस्टर से काटे गये धान के पैरा को संग्रहित कर बंडलींग करना ही है, जिससे किसानों को बहुत सुविधा होती है। ग्राम धरमपुरा और मानिकचैरी के किसानों ने भी क्षेत्र के ग्रामीण कृषी विस्तार अधिकारी को पैरादान करने के लिए अपनी इच्छा जताई है। धरमपुरा से गीता कुमार पिता सिताराम एवं उत्तम कुमार पिता मिन्नू, ग्राम मानिकचैरी से छबी पिता भैरव एवं शिव कुमार पिता आजू राम ने अपने खेतों में पड़े पैरे को दान करने का संकल्प लिया है। इसी तरह स.लोहारा विकासखण्ड के ग्राम खड़ौदा के उपेन्द्र जायसवाल ने अपने 35 एकड़ खेत का पैरादान कर उसके संग्रहण कि सहमति दी है। ज्ञात हो की सुराजी गांव योजना के तहत जिले में प्रथम चरण पर 74 गौठान का निर्माण कार्य कराया गया है। गौठानों में पशुधन रहते है उनके चारे की व्यवस्था के लिए चारागाह का विकास तो किया ही जा रहा है साथ ही ग्रामीणों को पैरादान करने के लिए प्रशासन जागरूकता अभियान भी चला रहा है, जिसका नतीजा है कि ग्रामीण स्वेच्छा से आगे आकर बड़ी मात्रा में पैरादान कर रहें है। जो की इस योजना से लोगो के जुड़े होने को प्रदर्शित करता है।

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