,डी एन योगी, एडीटर एन चीफ कबीर क्रांति

 कवर्धा,,,,,,,

Dipawali ” त्यौहारों में हर जिले की तरह यहां भी ‘ पत्रकारों ” को लिफाफे देने की परम्परा है और नही तो ‘ गिफ्ट ‘…..पर यह परम्परा कहाँ से व कब प्रारंभ हुयी ,इसे लेकर अनुसंधान जारी है ।
शायद हर बार की तरह इस बार भी ” लिफाफे ” के साथ विज्ञापन भी बांटे गये और अंदाजा लगाना कठिन है की लिफाफे का वजन कितना था …पर मंदी के दौर में भी लाखों का लिफाफा वितरित कर देना ” आश्चर्य ” है ना …..लेकिन जिले के कई अधिकारियों व नेताओं ने तो अपना Mobile ही बंद कर रखा ‘ कही ‘ कोई मांगने ना आ जाये ‘ पिछला ‘ बाकी है कम से कम उसे ही दे दो ना …..” खैर ”….पर अब मजा आयेगा जिनको इंतजार के बाद भी लिफाफा ही नही मिला और कुछ तो बेचारे सुबह से ही ‘ हाजिरी ‘ लगाकर वसूली कर लिये !
अपना – अपना Subject है किसे कितने मिला ,, वक्त का इंतजार करो ….कुछ विभागों में CCTV भी लगा है मित्रों ….खंगाला जा रहा है तो वहीं अधिकांश विभागों में ” पत्रकारों ” की जो सूची उपलब्ध करायी गयी है व जाती है वो अरसे से छोड़ चुके पत्रकारिता वाले लोग ही होते हैं ।
” खैर ”…..पर जिसे नही मिला वह तो अब बजायेगा और लिफाफे तो लेने का प्रश्न ही नहीं है ????

लिफाफे की चर्चा जोरों पर …..

दीपावली के त्यौहार के समय पर दिये गये ‘ लिफाफों ‘ की चर्चा राजनैतिक गलियारों में जोरों से है आखिर कौन सा लिफाफा किसको मिल गया …यह भी बाजार में बातें टिकी हुई है ।
हालांकि हर मौसम में आधिकारिक रूप से लिफाफे को वजन के हिसाब से दिये जाने की परम्परा है या फिर किसके संबंध किससे ” खराब ” और ” मधुर ” है पर लिफाफा भी मंदी के हिसाब से नही चलता ..? वह बजाने के ऊपर ज्यादा डिपेंड करता है आखिर वर्ष में आपने किसको..कब ..कितने बार …बजाया !
” खैर ” ….शहर में ही नही ग्रामीण क्षेत्र में इतने सारे पत्रकार हो गये है कि ‘ आखिर ‘ लिफाफा भी कितने को दिया जायेगा ,, पर इस बार की दिपावली में बडे़ नोट के बदले छोटे नोट ज्यादा दिये गये है ।
लेकिन जिसको कम और नही मिला ” वो ” तो बजाने की तैयारी आरंभ कर दिया ” तो ” तकलीफ जरूर होगी ….चुनाव भी सामने है मित्रों ”कुछ विभाग,केअधिकारी प्रत्रकारो के नाम से लाखों रुपए वसूली करलेते हैं और स्वयं हजम कर लेते हैं इनको बजाना जरूरी है मित्रों।

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