कवर्धा

भुपेश बघेल विभीषणों से परेशान , कका जिंदा है स्लोगन विलोपित होने का सता रहा है डर ,,कबीरधाम जिले का कमांन मो, अकबर रायपुर से सम्हाले हुए है ,,,कका  का सुपड़ा साफ कार्यकर्ताओं में नराजगी,,,बाहर से आये नेताओ ने दलाली कर के कबीरधाम जिले से रफुचक्कर हो गये

  • भुपेश बघेल विभीषणों से परेशान , कका जिंदा है स्लोगन विलोपित होने का सता रहा है डर,, 

कबीरधाम जिले का कमांन मो, अकबर रायपुर से सम्हाले हुए है,,, 

कका  का सुपड़ा साफ कार्यकर्ताओं में नराजगी,,, 

  • बाहर से आये नेताओ ने दलाली कर के कबीरधाम जिले से रफुचक्कर हो गये,,, 

कवर्धा , कका जिंदा है का स्लोगन बरकार रहेगा कि विलोपित हो जाएगा यह चर्चा जोरों पर है दरअसल छत्तीसगढ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री भुपेश बघेल जी छत्तीसगढ़ में विलोपित हो रहे छत्तीसगढ़ी खेल कूद, तीज त्यौहार, व्यंजन सहित समस्त परंपराओ को आगे बढ़ाने में काफी प्रयास किया है जिसके चलते छत्तीसगढ़ में कका के नाम से मशहूर हो गए । मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायको से उनका काफी अनबन रहा जो समय समय पर सामने भी दिखाई दे रहा था लेकिन मजबूत कामकाज और बेबाक होने के कारण किसी ने कुछ नही बिगाड़ पाया । पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायको की नाराजगी के चलते ही 2023 की विधान सभा चुनाव में एक दुसरे को किनारे करने के चक्कर में सभी दिग्गज किनारे हो गया और सत्ता से बाहर हो गए। लोकसभा चुनाव भी ठीक ठाक नही चल रहा है यहां भी वैसी हालत है ।

कका जिंदा है स्लोगन विलोपित होने सता रहा है डर

जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विधान सभा चुनाव में करारी हार का सामना पार्टी को हुआ था कहीं उसी तरह लोकसभा चुनाव में भी काग्रेस पार्टी निपट गया तो छत्तीसगढ के कका के नाम से प्रसिद्ध भूपेश बघेल का कका जिंदा है विलोपित होने में तकीन भी देर नही लगेगा।

विभीषणों से परेशान

छत्तीसगढ में कांग्रेस नेताओ का पार्टी बदलने का होड़ मची हुई है तो कुछ लोग विभीषण की भूमिका में नजर आ रहे हैं तो कई अवसर वादी नेता कुंभक्रणीय नींद में है । जिससे पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश काग्रेस पार्टी परेशान है। विधान सभा चुनाव की तरह एक दूसरे को निपटाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते इस तरह की भूमिका में नजर आ रहे हैं।

वर्चस्व की है लड़ाई

  • विधान सभा चुनाव में करारी हार और विरोधियों के द्वारा हार का ठीकरा फोड़ने के बाद पार्टी में थोड़ा छवि धूमिल हुई है जिसके चलते छत्तीसगढ़ विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष चरण दास मंहत जी को बनाया है। यदि भूपेश बघेल लोक सभा चुनाव हार गए तो पार्टी में वर्चस्व कायम नही रह पाने का डर सता रहा है।
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