कवर्धा,,कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट *महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षकों पर सरकारी गाड़ी में सैर-सपाटे के आरोप* *विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, वायरल फोटो-वीडियो ने खोली पोल*

कवर्धा,,कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट
*महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षकों पर सरकारी गाड़ी में सैर-सपाटे के आरोप*
*विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, वायरल फोटो-वीडियो ने खोली पोल*
कवर्धा महिला एवं बाल विकास विभाग की कुकदुर परियोजना अंतर्गत पर्यवेक्षक टीम एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 11 जून को कबीर प्राकट्य दिवस के सामान्य अवकाश के दिन, टीम ने निरीक्षण के बहाने बीरनपुर कला स्थित आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र का दौरा किया, लेकिन इसके बाद सहसपुर ग्राम के डेम और मंदिर परिसर में पिकनिक मनाने के दृश्य कैमरे में कैद हो गए। अब यह फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार निरीक्षण की जानकारी पहले ही कार्यकर्ताओं को दे दी गई थी, जिससे केंद्र में कृत्रिम उपस्थिति दर्शाने के लिए बाहर से बच्चों को बुलाया गया। ऐसे में अवकाश के दिन “निरीक्षण” तय करना अपने आप में संदेहास्पद है। बीरनपुर कला, सहसपुर लोहारा के पास एक मैदानी गांव है, जबकि जिस डेम व मंदिर परिसर में भ्रमण किया गया वह गांव से लगभग 10-12 किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। सरकारी वाहन का उपयोग कर वहां तक का सफर किया गया।
सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग करने के आरोप में यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सरकारी वाहन, डीजल, समय और मानव संसाधन का इस तरह से ‘सैर-सपाटे’ के लिए उपयोग न केवल नीतिगत मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 की धारा 3 और 5 के अंतर्गत पदीय दुरुपयोग की श्रेणी में आता है। साथ ही छत्तीसगढ़ वित्त संहिता एवं सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी वाहनों के उपयोग संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देशों के तहत यह एक स्पष्ट उल्लंघन है।
अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या जिला कार्यक्रम अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर संबंधित पर्यवेक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे या मामला एक बार फिर ‘आंतरिक जांच’ की आड़ में दबा दिया जाएगा। जनता की अपेक्षा पारदर्शिता और जवाबदेही की है, और स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि निरीक्षण वास्तव में उद्देश्यपरक होता, तो न तो अवकाश के दिन तय होता और न ही निरीक्षण के नाम पर पिकनिक जैसी गतिविधियां होतीं।




