12 लाख 34 हजार की सड़क… मात्र सिर्फ 4 महीने में उखड़ गई पूरी सच्चाई देखिये** कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट पंडरिया,,,नगर पालिका परिषद पंडरिया के समरूपारा से सतीश नगर जाने वाली लाखों रुपये की लागत से बनी सड़क अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी बयां कर रही है। जिस सड़क को वर्षों तक मजबूत रहना था, वह महज चार माह में ही टूटने और उखड़ने लगी है। ** सड़क पर जगह-जगह गड्ढे ** उखड़ रही गिट्टियां ** दरक चुकी सतह ** और सबसे बड़ा सवाल — सूचना पटल तक गायब! स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। जनता पूछ रही है कि आखिर किस अधिकारी ने इस सड़क का गुणवत्ता परीक्षण किया था? और खराब निर्माण करने वाले ठेकेदार को दोबारा काम किस आधार पर दिया जा रहा है? उठ रहे हैं बड़े सवाल ? सिर्फ 4 माह में सड़क क्यों टूट गई? ? सूचना पटल क्यों नहीं लगाया गया? ? निर्माण की तकनीकी जांच किसने की? ? दोषपूर्ण निर्माण के बावजूद ठेकेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं? ? जनता के टैक्स के पैसों की भरपाई कौन करेगा? स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। “जब सड़क चार माह में टूट जाए और सूचना पटल तक न लगे, तो सवाल केवल सड़क का नहीं, पूरी व्यवस्था की नीयत का खड़ा होता है।” अब निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं… क्या होगी निष्पक्ष जांच? या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा? कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट

12 लाख 34 हजार की सड़क… मात्र सिर्फ 4 महीने में उखड़ गई पूरी सच्चाई देखिये**
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़ देखिये डी एन योगी की रिपोर्ट
पंडरिया,,,नगर पालिका परिषद पंडरिया के समरूपारा से सतीश नगर जाने वाली लाखों रुपये की लागत से बनी सड़क अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी बयां कर रही है। जिस सड़क को वर्षों तक मजबूत रहना था, वह महज चार माह में ही टूटने और उखड़ने लगी है।
** सड़क पर जगह-जगह गड्ढे
** उखड़ रही गिट्टियां
** दरक चुकी सतह
** और सबसे बड़ा सवाल — सूचना पटल तक गायब!
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। जनता पूछ रही है कि आखिर किस अधिकारी ने इस सड़क का गुणवत्ता परीक्षण किया था? और खराब निर्माण करने वाले ठेकेदार को दोबारा काम किस आधार पर दिया जा रहा है?
उठ रहे हैं बड़े सवाल
? सिर्फ 4 माह में सड़क क्यों टूट गई?
? सूचना पटल क्यों नहीं लगाया गया?
? निर्माण की तकनीकी जांच किसने की?
? दोषपूर्ण निर्माण के बावजूद ठेकेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं?
? जनता के टैक्स के पैसों की भरपाई कौन करेगा?
स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश
लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
“जब सड़क चार माह में टूट जाए और सूचना पटल तक न लगे, तो सवाल केवल सड़क का नहीं, पूरी व्यवस्था की नीयत का खड़ा होता है।”
अब निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं…
क्या होगी निष्पक्ष जांच?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
कबीर क्रांति ब्रेकिंग न्यूज़
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